The Pasteur Institute of Iran is shown heavily damaged after strikes, in Tehran, on April 2, 2026. मिडिल ईस्ट में एक महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष अब और तेज हो गया है, जिसमें अमेरिका, ईरान, इजरायल और क्षेत्रीय शक्तियां आमने-सामने हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्टोन एज में भेजने की धमकी दी है. उनके इस बयान के बाद ईरान पर अमेरिकी हमले तेज हो गए हैं. वहीं, ईरान भी पूरे दमखम के साथ जवाबी हमले कर रहा है.
अमेरिका के दावों के बावजूद कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है, तेहरान ने इजरायल और मिडिल ईस्ट में अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर नए हमले जारी रखे हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोन्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाया है. उसने बहरीन में अमेजन के क्लाउड कम्प्यूटिंग सेंटर और दुबई में ओरेकल के डेटा सेंटर पर हमले का दावा किया है.
बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने एक इमरजेंसी अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले 24-48 घंटों में ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन हमले कर सकते हैं, और अपने नागरिकों से तुरंत इराक छोड़ने को कहा है. इधर इजरायल ने कहा कि छह घंटे के भीतर ईरान ने मिसाइल हमलों की कम से कम चार लहरें दागीं. इजरायल के मुताबिक कई मिसाइलों को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन कुछ मिसाइलें उसके मध्य क्षेत्रों में गिरीं, जिसमें जानमाल का नुकसान हुआ है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे और हमलों के संकेत देते हुए कहा है कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़े प्रहार किए जाएंगे, हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान अपने लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है. इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा, जहां तेल की कीमतों में 4% से अधिक की तेजी आई. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सप्लाई बाधित होने के कारण स्थिति और बिगड़ रही है.
रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट से अपने कर्मचारियों को निकालने का आखिरी फैसला लिया है. कंपनी के सीईओ एलेक्सी लिकचेव के मुताबिक, करीब 200 कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा, जबकि रिएक्टर चलाने के लिए केवल कुछ वॉलंटियर्स की छोटी टीम ही वहां रुकेगी. रूस ने इस सुरक्षित निकासी के लिए अमेरिका और इजरायल से गोलाबारी रोकने की मांग भी की है. हालांकि, प्लांट में आग लगने की कई खबरें आई थीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने साफ किया है कि रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं हुआ है और न ही कोई रेडिएशन फैला है.
पांच हफ्तों से अमेरिका और इजरायल की भारी बमबारी के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत अभी भी काफी मजबूत है. CNN की एक रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के हवाले से बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर अभी भी पूरी तरह सुरक्षित और काम करने की हालत में हैं. इसके अलावा, ईरान के पास हजारों की संख्या में वन-वे अटैक ड्रोन का जखीरा मौजूद है. लगातार हो रहे हमलों के बावजूद ईरान का डिफेंस सिस्टम बचा हुआ है, जो युद्ध के मैदान में पासा पलट सकता है.
ईरान अब ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट आफ होर्मूज की निगरानी करने की तैयारी में है. खबर है कि ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों से $20 लाख तक की मांग कर रहा है. ईरानी राजनयिक का कहना है कि यह जहाजों की सुरक्षा के लिए है, लेकिन असल में इससे इस समुद्री रास्ते पर ईरान का कब्जा और मजबूत हो जाएगा. फिलहाल ओमान ने अभी इस पर कुछ नहीं कहा है.
मिलिशिया संगठन सराया औलिया अल-दाम ने इराक में पिछले 24 घंटों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए कई हमलों की जिम्मेदारी ली है. समूह ने कहा कि उसने पांच हमले किए और इराक व आसपास के क्षेत्र में कुल 23 अभियान चलाए. संगठन ने यह भी बताया कि इन हमलों को अंजाम देने के लिए दर्जनों ड्रोन तैनात किए गए थे.
ईरान के निर्माणाधीन B1 ब्रिज अमेरिकी हवाई हमले में मरने वालों की संख्या 8 हो गई, जबकि 95 अन्य घायल हुए हैं. यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया ने अल्बोर्ज प्रांत के अधिकारियों के हवाले से दी है. यह हमला जिस वक्त हुआ, तब ब्रिज के आसपास बड़ी संख्या में लोग नेचर डे मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मिडिल ईस्ट का सबसे ऊंचा ब्रिज बताया और सोशल मीडिया पर कहा कि आगे और भी बहुत कुछ होने वाला है. ईरानी अधिकारियों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक ढांचे पर हमला बताया है और कहा कि उस समय वहां कोई सैन्य गतिविधि नहीं हो रही थी.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना प्रमुख रैंडी जॉर्ज को पद छोड़ने और तुरंत रिटायरमेंट लेने का आदेश दिया है. अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज के अचानक पद छोड़ने पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है. इस फैसले को ट्रंप प्रशासन और जनरल जॉर्ज के बीच मतभेद का परिणात बताया जा रहा है. अमेरिका इस समय ईरान के साथ युद्ध में है, इसके बीच सेना प्रमुख को पट से हटाने का फैसला चौंकाने वाला है. जनरल जॉर्ज, जिन्होंने अगस्त 2023 में जो बाइडेन प्रशासन के दौरान यह पद संभाला था, चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले थे. उन्होंने खाड़ी युद्ध के साथ-साथ इराक और अफगानिस्तान युद्ध में भी अपनी सेवाएं अमेरिकी सेना को दी हैं. इसके अलावा, वह पूर्व रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के वरिष्ठ सैन्य सहयोगी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.