मध्य पूर्व में आने वाले दिनों में शांति होगी या जंग, यह मंगलवार को ईरान-अमेरिका के बीच होने वाली अहम बैठक से साफ हो जाएगा. दूसरे दौर की ये बातचीत जिनेवा में होनी है. इससे पहले ओमान की राजधानी मस्कट में दोनों मुल्कों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई थी. नतीजतन दोनों मुल्कों ने दूसरे दौरे के बातचीत के लिए हामी भरी.
इस बातचीत से पहले अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में कहा है कि ईरान के साथ समझौता करना बेहद कठिन साबित होगा. उनका यह बयान इस तथ्य पर आधारित है कि ईरान का नेतृत्व धार्मिक लोगों के नियंत्रण में है, जो नीतियां धर्मशास्त्र के आधार पर बनाते हैं. रुबियो ने यह भी बताया कि इस वजह से किसी भी प्रकार की डील पर पहुंचना इतना आसान नहीं है.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान ने इस महीने की शुरुआत में अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू की है. अमेरिका, पश्चिमी देशों और इजरायल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है, जबकि ईरान इस आरोप को लगातार नकारता रहा है.
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सोमवार को ईरान के विदेश मंत्री ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख से मुलाकात की. हालांकि यह बैठक व्यापक बातचीत से पहले आयोजित हुई, दोनों पक्षों से कोई साफ संकेत नहीं मिल पाए कि समझौते की दिशा में कोई ठोस कदम उठा लिया गया है.
सुरक्षा की नजरिए से, अमेरिका ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है. पिछले साल जून माह में इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हवाई हमलों के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी भेजा है. इसके अलावा पहले से मौजूद युद्धपोत और विमानों की संख्या भी बढ़ाई गई है.
अमेरिका चाहता है कि बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित न रहे और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम जैसे अन्य विषय भी शामिल किए जाएं. वहीं, ईरान ने कहा है कि वह केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाओं की चर्चा करेगा, खासकर प्रतिबंधों में राहत के बदले. उसने साफ किया है कि शून्य यूरेनियम संवर्धन करने की बात नहीं होगी और मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत नहीं होगी.
इनपुट: रॉयटर्स