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भुखमरी... तस्वीरें बता रही हैं जंग के मोर्चे पर तैनात यूक्रेनी सैनिकों की हालत, हफ्तों तक नहीं मिल रहा खाना

यूक्रेन के सैनिकों की पीड़ा को एक सैनिक की पत्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "रेडियो पर उनकी बात नहीं सुनी गई, या शायद कोई उन्हें सुनना नहीं चाहता था. मेरे पति चिल्लाए और गिड़गिड़ाए, उन्होंने कहा कि हमारे पास खाना और पानी नहीं है."

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जंग के मौर्चे पर तैनात यूक्रेनी सैनिकों को हफ्तों तक राशन की सप्लाई नहीं हो रही है. (Photo: X/@CitiznYC)
जंग के मौर्चे पर तैनात यूक्रेनी सैनिकों को हफ्तों तक राशन की सप्लाई नहीं हो रही है. (Photo: X/@CitiznYC)

यूक्रेन और रूस की लड़ाई ने यूक्रेन में फूड सप्लाई चेन को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है. यूक्रेन की ओर से लड़ रहे कई सैनिकों को 10 से 15 दिनों तक खाना नहीं मिल रहा है. चार बेहद दुबले-पतले सैनिकों की दर्दनाक याचिकाओं और उनकी तस्वीरों ने अप्रैल के अंत में यूक्रेन में तहलका मचा दिया था. बताया गया कि ये सैनिक फ्रंटलाइन पर 17 दिनों तक बिना खाने के रह गए थे और कई महीनों से उनकी छुट्टी या रोटेशन नहीं हुई थी.  

ये सैनिक बिना भोजन के ड्यूटी पर तैनात थे. स्थिति ऐसी हो गई थी कि ये सैनिक भूख से बेहोश हो रहे थे और बारिश का पानी पी रहे थे. 

अनास्तासिया सिलचुक जिनके पति 14वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड में काम करते हैं, ने 22 अप्रैल को सोशल मीडिया पर कहा, "सैनिक भूख से बेहोश हो रहे थे, वे बारिश का पानी पीने को मजबूर थे."

यूक्रेन में जंग के मोर्चे पर तैनात सैनिकों की कहानियों पर अल जजीरा ने एक लंबी रिपोर्ट जारी की है. 

यूक्रेन के ये लड़ाके दक्षिण-पूर्वी डोनेट्स्क इलाके में ओस्किल नदी के पास एक स्थान पर छिपे हुए थे. रूसी बमों ने इन सैनिकों के ब्रिगेड पर बमों से हमला किया था और एक अहम पुल को तोड़ दिया था. 

सिलचुक ने लिखा, "रेडियो पर उनकी बात नहीं सुनी गई, या शायद कोई उन्हें सुनना नहीं चाहता था. मेरे पति चिल्लाए और गिड़गिड़ाए, उन्होंने कहा कि हमारे पास खाना और पानी नहीं है."

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अल जजीरा ने जब उनसे इस मुद्दे पर ज्यादा बात करनी चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. 

ओलेक्ज़ेंडर नाम के एक सैनिक ने अल जजीरा को बताया कि उसने अपने देश के लिए लड़ते हुए भूख की पीड़ा को महसूस किया है. 

इस साल की शुरुआत में दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन की खुली, पेड़ों से खाली फ्रंट लाइन पर एक छिपे हुए बंकर में छिपे रहने के दौरान ओलेक्ज़ेंडर को अपने परिवार घर और रूस के 2022 के बड़े हमले से पहले की ज़िंदगी की बहुत याद आई. लेकिन उन्हें सबसे ज़्यादा असली खाने की याद आई.

कीव में पैर के घाव से ठीक हो रहे सैनिक ने अल जज़ीरा को बताया, "आप गर्म खाने का सपना देखते हैं, क्योंकि हफ़्तों तक आपको चॉकलेट बार, ओटमील और रोज एक बोतल पानी ही मिलता है."

रूस की ओर भी स्थिति खराब ही है

रूस की तरफ भी हालात खतरनाक हैं, क्योंकि सैनिकों को यूक्रेनियन से बचने के लिए दो-दो या तीन-तीन की संख्या में आगे बढ़ने का ऑर्डर दिया गया है. 

लेकिन अक्सर ड्रोन से उनका शिकार किया जाता है. 

छोटे, सस्ते और विस्फोटकों से भरे सुसाइड ड्रोन ने टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को डायनासोर जैसा बना दिया है जिनका वजूद खत्म होने वाला है. 

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इन कमजोर सैनिकों की तस्वीरें वायरल होने के कुछ दिनों बाद ब्रिगेड के अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि "रोटी से लेकर अलग किए गए जनरेटर तक... हर चीज की डिलीवरी हवाई रास्ते से की जाती है" और रूसी सेना "जितने हो सकें उतने ड्रोन को रोकती है, मार गिराती है."

हालांकि इस तस्वीर के वायरल होने के बाद ब्रिगेड के कमांडिंग ऑफिसर को नौकरी से निकाल दिया गया. 

इस मामले में यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने जांच का आदेश दिया और 28 अप्रैल को कहा कि ब्रिगेड और पास की दो और मिलिट्री यूनिट्स को खाने की कम सप्लाई एक रूटीन नहीं बन जाना चाहिए. 

ओलेक्ज़ेंडर ने कहा कि उन्हें वह समय याद है जब ड्रोन रूसी सैनिकों के लिए एक नई चीज़ थे. 

ओलेक्ज़ेंडर ने कहा, "जब हम भारी वैम्पायर ड्रोन उड़ाते थे, तो वे उन्हें ऊपर से तब तक देखते रहते थे जब तक वे अपना लोड गिरा नहीं देते." 

4 वर्षों से ज्यादा समय से जंग

यूक्रेन और रूस की लड़ाई को 4 वर्षों से ज्यादा समय गुजर गए हैं. 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था. रूस का उद्देश्य यूक्रेन को नाटो से दूर रखना, पूर्वी क्षेत्रों जैसे डॉनबास पर नियंत्रण और क्रीमिया को सुरक्षित करना था. 

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अब रूस यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा रखता है, लेकिन 2026 में यूक्रेनी सेना ने ड्रोन, लंबी दूरी के हमलों और बेहतर रणनीति से रूसी अग्रिम को रोका और कुछ क्षेत्र वापस छुड़ाए.  दोनों पक्षों को इन 4 वर्षों में भारी नुकसान हुआ है. अभी शांति वार्ता चल रही है, लेकिन क्षेत्रीय रियायतों और सुरक्षा गारंटी पर मतभेद बने हुए हैं. अब ये युद्ध थका देने वाले फेज में पहुंच गया है. 

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