तुर्की में सोमवार को आए भीषण भूकंपों ने सभी को दहला कर रख दिया. भूकंप से तुर्की और सीरिया में अब तक 6200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि तुर्की में अब तक 8000 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है. कहा जा रहा है कि बीते दो दिन में वहां 550 से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं.
देश में हर जगह तबाही का खौफनाक मंजर इस त्रासदी की कहानी बयां कर रहा है. ऐसे में राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप अर्दोगन ने भूकंप से प्रभावित 10 प्रांतों में तीन महीने के लिए इमरजेंसी का ऐलान किया है. इसके साथ ही सरकार ने सभी स्कूलों को 13 फरवरी तक बंद रखने की भी घोषणा की है.
भारत सहित 70 देश कर रहे मदद
भूकंप की भीषण मार झेल रहे तुर्की को भारत सहित दुनियाभर के 70 देशों और 14 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मदद का हाथ बढ़ाया है. भारत सरकार ने तुर्की के प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान चलाने के लिए गाजियाबाद और कोलकाता बेस से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के 101 कर्मियों वाली 2 USAR टीमों की तैनाती का निर्देश दिया है.
एनडीआरएफ का कहना है कि इसके साथ ही 51 बचावकर्ताओं की टीम ने उपकरणों के साथ आज सुबह तुर्की के लिए उड़ान भरी और तुर्की पहुंच गई. 50 कर्मियों वाली एक अन्य टीम भी तुर्की के लिए रवाना हो गई है.
इसके अलावा कतर भूकंपग्रस्त तुर्की की मदद के लिए 10,000 कंटेनर हाउसेज भेजने जा रहा है. तुर्की ने भी शेल्टर के तौर पर इस्तेमाल में लाने के लिए 10,000 कंटेनर्स तैयार किए हैं, जिन्हें भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है. भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में 54000 टेंट और 102,000 बेड भेजे गए हैं. सभी सरकारी इमारतों का इस्तेमाल भूकंप पीड़ित शेल्टर के लिए कर सकेंगे. इन इलाकों में 50,000 राहतकर्मियों को तैनात किया गया है.
नींद से कभी नहीं उठ पाए लोग...
तुर्की और सीरिया के कई शहर सोमवार तड़के ही भूकंप की चपेट में आ गए. भूकंप के कंपन इतनी तेज थे कि इमारतें भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढह गईं. तुर्की और सीरिया में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. भूकंप का पहला झटका सुबह 4.17 मिनट पर उस समय आया, जब ज्यादातर लोग घरों में सो रहे थे. ऐसे में जब भूकंप आया और इमारतें गिरीं, उन्हें जान बचने का कोई मौका ही नहीं मिला. पलभर में इमारतें ढह गईं और घरों में सोते लोग मलबे में दब गए.
खराब मौसम के चलते रेस्क्यू में दिक्कत
तुर्की और सीरिया में रेस्क्यू अभियान जोरों पर है. भारत ने तुर्की में अपनी रेस्क्यू टीम भेजी है. उधर, अमेरिका समेत नाटो के सभी 70 देश भी तुर्की की मदद के लिए आगे आए हैं. रेस्क्यू टीमें मलबों में जिंदगियों की तलाश में जुटी हैं. हालांकि, खराब मौसम और ठंड के चलते रेस्क्यू में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.