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ट्रंप की पार्टी में बगावत! ईरान जंग पर हुई वोटिंग में 4 रिपब्लिकन ने डेमोक्रेट्स का दिया साथ

फिलहाल, दोनों सदनों में रिपब्लिकन को मामूली बढ़त हासिल है. हाउस में वे 217-212 से और सीनेट में 53-45 से आगे हैं. दो निर्दलीय सीनेटर आमतौर पर डेमोक्रेट्स का समर्थन करते हैं.

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रिपब्लिकन सांसदों ने तोड़ी पार्टी लाइन (File Photo: Getty Image)
रिपब्लिकन सांसदों ने तोड़ी पार्टी लाइन (File Photo: Getty Image)

मंगलवार को चार रिपब्लिकन सांसदों ने डोनाल्ड ट्रंप की बात नहीं मानी और डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर वोट दिया. इससे सीनेट ईरान युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गई, क्योंकि 'वॉर पावर्स एक्ट' के तहत ट्रंप के अधिकारों पर लगाम लगा दी गई. यह प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हुआ, जबकि तीन अन्य रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए.

केंटकी के सीनेटर रैंड पॉल, मेन की सुसान कॉलिन्स, अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की और लुइसियाना के बिल कैसिडी ने ट्रंप के खिलाफ वोट दिया. हालांकि, पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेट्टरमैन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया.

इस तरह की 'क्रॉस-वोटिंग' को राष्ट्रपति के लिए एक सार्वजनिक फटकार के तौर पर देखा जा रहा है. राष्ट्रपति को आमतौर पर उनकी पार्टी और उनके वोटरों का पूरा समर्थन मिलता रहा है, लेकिन यह युद्ध 81 दिनों से खिंचता चला आ रहा है और इसका कोई साफ अंत भी नजर नहीं आ रहा है.

मिडिल-ईस्ट संकट से अमेरिका को नुकसान

28 फरवरी को शुरू हुई लड़ाई में अब तक पूरे खाड़ी क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इससे आम लोगों और ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. इसके साथ ही, दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग चैनल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद करना पड़ा है. इस लड़ाई में अमेरिका को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी है. पेंटागन के पिछले अनुमान के मुताबिक, इस पर $29 अरब खर्च हुए हैं और इसके चलते उसके सहयोगी देशों के साथ रिश्ते भी खराब हुए हैं.

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मंगलवार को सीनेट में हुए वोट का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप को इस लड़ाई से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के लिए मजबूर किया गया है. लेकिन, यह उन सांसदों की जीत है, जो यह तर्क दे रहे थे कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है.

खास तौर पर, डेमोक्रेट्स ने 'वॉर पावर्स एक्ट' का हवाला दिया है. यह एक ऐसा कानून है, जिसके तहत कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति बिना मंजूरी के एक बार में 60 दिनों से ज्यादा वक्त के लिए सेना तैनात नहीं कर सकता.

यह भी पढ़ें: PM मोदी और ट्रंप की अगले महीने होगी मुलाकात, जानिए किस देश में मिलेंगे

डेमोक्रेट्स और ट्रंप की इस लड़ाई के आलोचकों के मुताबिक, यह समय सीमा 1 मई को ही खत्म हो चुकी थी. हालांकि, व्हाइट हाउस का कहना है कि 'वॉर पावर्स' की घड़ी 8 अप्रैल को ही रुक गई थी, जब सीजफायर का ऐलान किया गया था. इस हिसाब से, ट्रंप को ईरान के खिलाफ एकतरफा तौर पर सेना तैनात करने के लिए कम से कम 40 दिन और मिल गए थे.

लेकिन अमेरिकी नौसेना होर्मुज में ईरानी जहाजों की नाकेबंदी के लिए तैनात है.

War Powers Act को लागू करने के लिए, डेमोक्रेट्स को मुख्य प्रस्ताव को 100-सदस्यीय सीनेट और House of Representatives, दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पास करवाना होगा. लेकिन इस चरण पर ऐसा होने की उम्मीद कम है, क्योंकि फिलहाल, दोनों सदनों में रिपब्लिकन को मामूली बढ़त हासिल है. हाउस में उन्हें 217-212 और सीनेट में 53-45 की बढ़त है. दो निर्दलीय सीनेटर आमतौर पर डेमोक्रेट्स का समर्थन करते हैं.

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इस बीच, युद्ध खत्म करने के लिए इस हफ्ते नए प्रस्तावों के आदान-प्रदान के साथ कूटनीतिक प्रयास जारी रहे. ईरान ने 14-सूत्रीय योजना पेश की, जिसमें हर्जाने की मांग, अपने कच्चे तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज पर अपने अधिकार को मान्यता देने की मांगें शामिल थीं.

वॉशिंगटन के जवाबी प्रस्ताव में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर और भी कड़ी पाबंदियों की मांग की गई थी, जिसमें 60 फीसदी एनरिच्ड यूरेनियम के कथित 440 किलोग्राम के भंडार का ज्यादातर हिस्सा सौंपने की शर्त भी शामिल थी.

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