अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी है. अब जानकारी आ रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौरा की वार्ता अगले हफ्ते होगी. हालांकि, अभी इस वार्ता की सटीक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है.
स्विट्ज़रलैंड विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की वार्ता अगले हफ्ते जिनेवा में होगी. इस वार्ता की मेजबानी ओमान करेगा, जिसने 6 फरवरी को आयोजित अप्रत्यक्ष चर्चाओं के पहले दौर को भी सुगम बनाया था. हालांकि, स्विस मंत्रालय ने वार्ता की तारीखों का खुलासा नहीं किया है.
ट्रंप की चेतावनी
वहीं, पहले दौर की वार्ता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि उनके प्रशासन के साथ समझौता करने में विफल रहने पर बहुत ही भयावह परिणाम हो सकते हैं. पिछले साल जून में इसी तरह की वार्ताएं टूट गई थीं, इसके बाद इजरायल ने ईरान पर अटैक कर दिया. दोनों के बीच 12 दिनों तक भीषण संघर्ष चला, जिसमें अमेरिका ने ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी.
ट्रंप ने बार-बार ईरान को अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के लिए बल प्रयोग की धमकी दी है. इसके जवाब में ईरान का कहना है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह जवाबी हमला करेगा.
ट्रंप ने ईरान में हालिया राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई के लिए भी धमकी दी है. जबकि खाड़ी अरब देशों ने चेतावनी दी है कि कोई भी हमला क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील हो सकता है.
विमानवाहक पोत मिडिल ईस्ट रवाना
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड कैरेबियन से मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है, जहां अमेरिका पहले से ही सैन्य संपत्तियां जमा कर चुका है. उन्होंने ये भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात होगी जो हो सकती है.
उधर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ के बीच हुई 6 फरवरी की अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी. इस वार्ता में पहली बार मिडिल ईस्ट के शीर्ष सैन्य कमांडर भी मौजूद थे.
ट्रंप प्रशासन का रुख है कि किसी भी समझौते के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाएगी. तेहरान ने इससे इनकार कर दिया है. ईरान ने दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसने अमेरिकी मांग से सहमत होने से इनकार कर दिया है.
आपको बता दें कि पिछले साल जून युद्ध से पहले ईरान 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था और आशंका थी वह जल्द ही परमाणु हथियार बना सकता है.