ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टारमर ने पिछले महीने रूस को बड़ी धमकी दी थी. उन्होंने कहा था कि उनके सैनिक रूस के कथित 'शैडो फ्लीट' के जहाजों को कब्जे में ले लेंगे जो बैन के बावजूद ब्रिटेन के जलक्षेत्र से होकर सामान ढो रहे हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सैनिक जहाजों पर चढ़कर उनकी जांच करेंगे. लेकिन स्टारमर की इस धमकी का अब तक कोई असर नहीं दिख रहा है बल्कि रूस के जहाज बिना किसी डर के ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजर रहे हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजरने वाले ऐसे रूसी जहाजों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है. स्टारमर ने 25 मार्च को यह चेतावनी दी थी. इसके बाद अगले एक महीने में ब्रिटेन की ओर से प्रतिबंधित कम से कम 98 रूसी जहाज उसके जलक्षेत्र से गुजरे, जो इससे पहले के तीन महीनों के औसत के लगभग बराबर है.
अब तक इन जहाजों में से किसी पर कब्जा करने, रोकने या हिरासत में लेने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
शैडो फ्लीट्स उन जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है जो आमतौर पर प्रतिबंधों, निगरानी और अंतरराष्ट्रीय नियमों से बचकर तेल, गैस या अन्य सामान ढोने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. ये जहाज आधिकारिक तौर पर किसी देश या बड़ी कंपनी से जुड़े नहीं दिखते, इसलिए इन्हें शैडो फ्लीट्स कहते हैं. माना जाता है कि रूस यूक्रेन के साथ जंग के बीच पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए इन जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है.
ब्रिटेन के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन से भी गुजर रहे रूसी जहाज
LSEG ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 63 जहाज इंग्लिश चैनल के रास्ते ब्रिटेन के तट से 12 नॉटिकल मील के भीतर से गुजरे. यह बाल्टिक सागर और दक्षिणी यूरोप के बीच सबसे सीधा समुद्री मार्ग है.
इसके अलावा 35 जहाज ब्रिटेन के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) से होकर गुजरे, जो तट से 200 नॉटिकल मील तक फैला है. इनमें ज्यादातर जहाज उत्तरी स्कॉटलैंड के आसपास से निकले.
वॉशिंगटन स्थित अटलांटिक काउंसिल की समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ एलिजाबेथ ब्रॉ ने कहा, 'अगर जल्दी बोर्डिंग कार्रवाई नहीं होती तो ये जहाज मान लेते हैं कि यह सिर्फ खाली धमकी थी, और फिलहाल दुखद स्थिति यही है कि जहाज ब्रिटेन की धमकी को खोखला मान रहे हैं.'
फ्रांस, बेल्जियम और स्वीडन जैसे कई यूरोपीय देशों ने हाल के महीनों में रूसी 'शैडो फ्लीट' के जहाजों को रोका और हिरासत में लिया है.
ब्रिटेन के पास रूस के शैडो फ्लीट्स को रोकने की पर्याप्त क्षमता नहीं
कभी दुनिया की बड़ी समुद्री ताकत रहे ब्रिटेन के पास अब 17वीं सदी के बाद सबसे छोटी नौसेना है. वहीं, उस पर पूर्वी यूरोप, आर्कटिक और मध्य पूर्व में सहयोगियों की मदद का दबाव भी है.
ब्रिटेन ने रूस की 'शैडो फ्लीट' से जुड़े 544 जहाजों को अपनी बैन लिस्ट में डाला हुआ है.
डेटा से यह भी पता चला कि ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजरने वाले कम से कम 10 जहाजों ने 'स्पूफिंग' की, यानी अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद किया या गलत लोकेशन दिखाई.
रूस का कहना है कि उसके जहाजों पर लगाए गए प्रतिबंध गैरकानूनी हैं. उसने ब्रिटेन की इस नई नीति को दुश्मनी भरा करार दिया और कहा कि इसका जवाब दिया जा सकता है.
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन की कार्रवाई न होने के पीछे कई वजहें हैं. ब्रिटेन के पास फ्रांस या स्वीडन जैसी मजबूत तटरक्षक बल की कमी है. इसके अलावा कानूनी अड़चनें भी हैं. रूस के इतने बड़े जहाजी नेटवर्क से निपटने में ब्रिटेन के सामने आर्थिक चुनौतियां भी हैं.