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Exclusive: 'यह हमारी लड़ाई नहीं', मिडिल ईस्ट संकट पर रूस बोला- ईरान को नहीं दिया इंटेलिजेंस सपोर्ट

रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने ईरान पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह जंग रूस की नहीं है और मॉस्को कोई सैन्य मदद नहीं दे रहा. उन्होंने अमेरिका पर यूरेनियम प्रस्ताव ठुकराने और डबल स्टैंडर्ड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार की मंशा नहीं थी और यह मुद्दा हमले का बहाना बना.

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ईरान पर अमेरिकी हमले की क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कड़ी निंदा की (File Photo- ITG)
ईरान पर अमेरिकी हमले की क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कड़ी निंदा की (File Photo- ITG)

मिडिल ईस्ट में ईरान और US-इजराइल के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. इस वैश्विक संकट के बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इंडिया टुडे टीवी को एक विशेष इंटरव्यू दिया. पेस्कोव ने ईरान-इजराइल संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय कानून के पतन, वैश्विक तेल संकट और भारत के साथ रूस के रणनीतिक संबंधों पर खुलकर अपनी राय रखी.

उन्होंने कहा कि रूस ईरान के खिलाफ हुई आक्रामक कार्रवाई की निंदा करता है. यह हमारी जंग नहीं है और रूस किसी तरह का सैन्य या इंटेलिजेंस सपोर्ट ईरान को नहीं दे रहा है. पेस्कोव ने अमेरिका की घेराबंदी की आलोचना करते हुए कहा कि क्यूबा में दवाओं की कमी से बच्चों का मरना अस्वीकार्य है. उन्होंने क्यूबा को रूस का 'प्रिय मित्र' बताया.

पेस्कोव ने दो टूक कहा कि ईरान ने यह जंग शुरू नहीं की, बल्कि उस पर हमला किया गया. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की और कहा कि मौजूदा हालात वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक हैं. रूस और चीन शुरू से ही चेतावनी देते रहे हैं कि ईरान मुद्दे का सैन्य समाधान गंभीर परिणाम लाएगा. हम लगातार कह रहे थे कि जंग से क्षेत्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता बढ़ेगी और आज वही हो रहा है.

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उन्होंने मौजूदा हालात को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि भले ही फिलहाल जमीन पर बमबारी रुकी हुई है, लेकिन इसके आर्थिक और रणनीतिक असर लगातार सामने आ रहे हैं.

पेस्कोव ने साफ किया कि रूस का जोर अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति पर है. उन्होंने कहा कि आज के समय में अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर और असुरक्षित हो गया है, जिसे फिर से मजबूत करने की जरूरत है. रूस सभी पक्षों- ईरान, अमेरिका, इज़रायल और खाड़ी देशों के साथ ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके.

होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक संकट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खाड़ी देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यहां लंबे समय तक अवरोध बना रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि रूस लगातार फ्री नेविगेशन यानी समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता की वकालत कर रहा है.

पेस्कोव ने कहा कि मौजूदा संकट के बीच भी रूस अपने सहयोगी देशों के लिए ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है. उन्होंने कहा कि खाड़ी से आने वाले तेल का करीब एक-तिहाई हिस्सा बाजार से बाहर हो चुका है, जिसे तुरंत पूरा करना संभव नहीं है. उन्होंने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत रूस का अहम साझेदार है और भविष्य में ऊर्जा सहयोग और बढ़ेगा.

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उन्होंने कहा, 'भारत हमारे लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण भागीदार है. हमारी कंपनियों का भारत के साथ केवल तेल की शिपमेंट तक सीमित रिश्ता नहीं है, बल्कि यह बहुत ही परिष्कृत और तकनीकी सहयोग है. हम इस पैमाने को और बड़ा करने के लिए तैयार हैं.'

यूरेनियम प्रस्ताव पर अमेरिका को घेरा

पेस्कोव ने खुलासा किया कि व्लादिमीर पुतिन ने पहले ईरान के संवर्धित यूरेनियम को रूस में रखने का प्रस्ताव दिया था, जिससे परमाणु खतरा कम किया जा सके. ईरान इस प्रस्ताव के लिए तैयार था, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया. अब यह प्रस्ताव बातचीत की मेज पर नहीं है, हालांकि जरूरत पड़ने पर रूस इसे फिर से उठा सकता है.

उन्होंने दावा किया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की मंशा नहीं जताई. उन्होंने कहा कि IAEA ने भी कभी यह नहीं कहा कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है. उनके मुताबिक, 'न्यूक्लियर हथियार का मुद्दा सिर्फ हमले का बहाना बनाया गया.'

बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट पर खतरा

बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट को लेकर पेस्कोव ने बताया कि वहां पास में गोलाबारी हुई थी, जो बेहद खतरनाक स्थिति थी. हालांकि उन्होंने कहा कि प्लांट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और रूसी कर्मियों को सुरक्षा के लिए वहां से हटा लिया गया है.

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इजरायल को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा कि दुनिया डबल स्टैंडर्ड से भरी हुई है. हर देश को सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन एक देश की सुरक्षा दूसरे देश की कीमत पर नहीं हो सकती. उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल और ईरान के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं.

पेस्कोव ने साफ किया कि रूस इस जंग का हिस्सा नहीं है और न ही ईरान को कोई सैन्य या खुफिया मदद दे रहा है. उन्होंने कहा, 'यह हमारी जंग नहीं है.'

ट्रंप पर टिप्पणी से इनकार

डोनाल्ड ट्रंप के 'सभ्यता के अंत' वाले बयान पर पेस्कोव ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट पर टिप्पणी नहीं करेंगे.

पेस्कोव ने कहा कि ईरान एक बड़ा और प्राचीन देश है, जो लंबे समय तक बना रहेगा. उन्होंने माना कि मौजूदा हालात में ईरान को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वह रूस का रणनीतिक साझेदार बना रहेगा.

पाकिस्तान और कूटनीति की भूमिका

पेस्कोव ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वह बातचीत के माहौल को बनाने में मदद कर रहा है. रूस भी शांति के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में संकट के कारण तेल और व्यापारिक आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर लंबे समय तक रहेगा. रूस ने संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर तेल और गैस की सप्लाई बढ़ा सकता है.

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क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई रेड लाइन अब मिट चुकी हैं. किसी देश के नेता की हत्या या किसी देश पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है. उन्होंने जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को फिर से मजबूत करना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि रूस और चीन के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत है और शी जिनपिंग और पुतिन के बीच जल्द बैठक होगी. उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर वैश्विक स्थिरता के लिए काम करेंगे.

पेस्कोव ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति पुतिन भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पुतिन भारत आएंगे या फिर वर्चुअली बैठक में हिस्सा लेंगे.

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