दुनिया के अधिकांश हिस्सों में रमजान की शुरुआत 18 और 19 फरवरी से हो चुकी है. सऊदी अरब, यूएई और भारत सहित कई देशों में मुसलमान रोजा रख रहे हैं. दुनिया के दो देश ऐसे हैं जहां अभी रमजान की शुरुआत नहीं हुई है, जबकि भारत में 19 फरवरी और खाड़ी के ज्यादातर मुल्कों में 18 फरवरी से रमजान का महीना शुरू हो गया है.
फिजी और न्यूजीलैंड में चांद नजर न आने के कारण पवित्र महीने की शुरुआत 20 फरवरी से होगी. न्यूजीलैंड में फेडरेशन ऑफ इस्लामिक एसोसिएशंस ऑफ न्यूजीलैंड (FIANZ) और फिजी मुस्लिम लीग ने घोषणा की कि 18 फरवरी की शाम, जो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 29 शाबान थी, रमजान का चांद दिखाई नहीं दिया. इसके चलते 19 फरवरी को शाबान का 30वां दिन पूरा किया जाएगा और 20 फरवरी को रमजान का पहला रोजा रखा जाएगा.
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दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया कि खगोलीय गणनाओं के अनुसार न्यूजीलैंड और फिजी ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में नहीं आते जहां उस दिन चांद का दिखाई देना संभव था, चाहे वह खुली आंखों से हो या दूरबीन की मदद से. बयान में कहा गया, "चूंकि इस क्षेत्र की धार्मिक संस्थाएं स्थानीय स्तर पर चांद दिखने पर ही भरोसा करती हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है."
यूएई, सऊदी अरब, कुवैत में 18 फरवरी से रमजान
वहीं दुनिया के कई देशों में 18 फरवरी से ही रमजान की शुरुआत हो गई. यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर, अफगानिस्तान, लेबनान, फिलिस्तीन और सूडान समेत कई देशों में पहले दिन का रोजा 18 फरवरी को रखा गया.
भारत ओमान, ब्रुनेई और मिस्र में 19 फरवरी से रमजान
दूसरी ओर भारत, पाकिस्तान, ओमान, ब्रुनेई और मिस्र जैसे देशों में 19 फरवरी से रमजान का आगाज हुआ. अलग-अलग देशों में चांद दिखने की स्थानीय परंपरा और खगोलीय स्थिति के आधार पर तारीख में एक दिन का अंतर आम बात है.
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हर साल क्यों आता है रमजान का महीना?
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे रोजा, इबादत और आत्मचिंतन का पवित्र महीना माना जाता है. चांद दिखने की प्रक्रिया इस्लामी परंपरा का अहम हिस्सा है और कई देशों में धार्मिक प्राधिकरण स्थानीय आधार पर ही महीने की शुरुआत की घोषणा करते हैं.