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ईरान जंग में साथ ना देने पर क्या ट्रंप देंगे NATO को सजा? पोलैंड PM ने अमेरिकी 'वफादारी' पर पूछे चुभते सवाल 

पोलैंड के प्रधानमंत्री  डोनाल्ड टस्क ने पूछा कि यदि भविष्य में रूस हमला करने की कोशिश करे तो उस स्थिति में क्या प्रतिक्रिया दी जाएगी? क्या अमेरिका यूरोप का साथ देगा?

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पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क (Photo: Reuters)
पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क (Photo: Reuters)

मिडिल ईस्ट महाजंग ने दुनिया की तस्वीर बदल कर रख दी है. अब वह वक्त बीत चुका है, जब अमेरिका के हर फैसले में उसके सहयोगी हां में हां मिलाते थे. ताजा उदाहरण नाटो (NATO) का है, जिसने साफ तौर पर ईरान जंग में अमेरिका के साथ खुलकर उतरने से परहेज किया. इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खफा हो गए और उन्होंने जमकर अपना गुस्सा निकाला. अब पोलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के रवैये पर सवाल उठाया है.

पोलैंड के प्रधानमंत्री  डोनाल्ड टस्क ने पूछा कि क्या रूस के हमले की स्थिति में अमेरिका नाटो के प्रति अपनी कमिटमेंट के तहत यूरोप की रक्षा के लिए 'वफादार' रहेगा? अब वक्त आ गया है कि यूरोपीय यूनियन को महाद्वीप की सुरक्षा के लिए वास्तविक गठबंधन बनाए.

टस्क का बयान इसलिए अहम माना जा रहा है कि क्योंकि पेंटागन के आंतरिक ईमेल से पता चला है कि ट्रंप प्रशासन में नाटो सहयोगियों को सजा देने के विकल्पों पर चर्चा हुई थी.

'रूस कर सकता है हमला'
टस्क ने फाइनेंशियल टाइ्स से बातचीत में कहा कि यूरोप के सामने सबसे बड़ा अहम सवाल यह है कि क्या अमेरिका उतना ही वफादार रहने के लिए तैयार है, जितना नाटो अलायंस में जिक्र है. उन्होंने चेतावनी दी कि रूस अगले कुछ महीनों में गठबंधन के किसी सदस्य पर हमला कर सकता है.

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यूरोप के अहम देश के मुखिया की यह असामान्य टिप्पणी बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है. राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों और यूरोप की रक्षा को लेकर उनके बदलते रवैये से ऐसे सवाल उठने लगे हैं.

टस्क ने कहा, 'सवाल यह है कि क्या नाटो अभी भी एक ऐसा संगठन है जो राजनीतिक और लॉजिस्टिक रूप से तैयार है? उदाहरण के लिए, यदि रूस हमला करने की कोशिश करे तो उस स्थिति में क्या प्रतिक्रिया दी जाएगी?

पोलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका-नेतृत्व वाले रक्षा गठबंधन के कुछ सदस्य ऐसा दिखावा कर रहे थे कि कुछ हुआ ही नहीं.  पिछले साल ही लगभग 20 रूसी ड्रोन पोलैंड के हवाई क्षेत्र में घुस आए थे.

टस्क ने जोर देकर कहा कि उनके शब्दों को नाटो के अनुच्छेद 5 के प्रति संदेह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. हमें यह देखना चाहिए कि यह मान्य है या नहीं. बल्कि इसे इस रूप में देखा जाना चाहिए कि कागज पर दी गई गारंटी वास्तव में कुछ प्रैक्टिकल हो.

NATO सहयोगियों को सजा देने की चर्चा!
इधर, पेंटागन के आंतरिक ईमेल से पता चला है कि ट्रंप प्रशासन में नाटो सहयोगियों को सजा देने के विकल्पों पर चर्चा हुई थी. अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इन सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायल की कार्रवाई में साथ देने से मना कर दिया था.

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हालांकि स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने रॉयटर्स की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पेंटागन के एक आंतरिक ईमेल में उन नाटो सदस्य देशों को दंडित करने के तरीकों पर विचार किया गया था. इसमें स्पेन को सैन्य गठबंधन से निलंबित करने की आशंका बताई गई थी.

ट्रंप ने नाटो को कागजी शेर कहा था
दरअसल, दुनिया के सबसे बड़े सैन्य संगठन नाटो और अमेरिका के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. हाल ही में जब नाटो प्रमुख मार्क रुटे व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे, तो माहौल काफी गरम रहा. ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह अपने साथी देशों के रवैये से खुश नहीं हैं. 

दरअसल, ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच ट्रंप को उम्मीद थी कि उनके सभी दोस्त देश कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे, लेकिन कई देशों ने ऐन मौके पर हाथ खींच लिए. पिछले कुछ हफ्तों से ट्रंप नाटो को कागजी शेर बताने में लगे हैं.

उनका कहना एकदम साफ है कि यूरोप के देश अपनी सुरक्षा के लिए तो पूरी तरह अमेरिका के भरोसे बैठे रहते हैं, लेकिन जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल को मदद की जरूरत पड़ी, तो इन्हीं देशों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए.

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