ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले और फिर तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे वेस्ट एशिया को जंग की आग में झोंक दिया है. इस बीच खबर है कि भारत के पास अब सिर्फ 50 दिनों का क्रूड ऑयल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है. ऐसे में रूस एक बार फिर भारत की मदद को आगे आया है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने संकेत दिया है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो वह भारत को ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग देने के लिए तैयार है.
यह मदद की पेशकश ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एनर्जी मार्केट को अस्थिर कर दिया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है.
भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त कच्चे तेल और ईंधन का भंडार है, जिससे वह छोटी अवधि के झटकों का सामना कर सकता है. भारत का लगभग आधा कच्चा तेल और एलपीजी का आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होता है. लेकिन हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों और उसके बाद तेहरान द्वारा जहाजों को दी गई चेतावनियों के चलते इस मार्ग पर शिपिंग गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.
सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास इस समय कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का कुल 50 दिनों का भंडार है, जिसमें 25 दिन का कच्चा तेल और 25 दिन के पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं. इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अधिकारी कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के आयात के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश भी कर रहे हैं.
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की घरेलू मांग पूरी करने के लिए छह से आठ सप्ताह तक के लिए पर्याप्त कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि मौजूदा भूराजनीतिक परिस्थितियों के कारण अगर अल्पकालिक आपूर्ति बाधित होती है, तो उससे निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है..
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है. इसके साथ ही वह रिफाइनिंग क्षमता में चौथे स्थान पर और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में पांचवें स्थान पर है. देश के पास मौजूदा में कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) जैसे प्रमुख ईंधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे तत्काल किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है.