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निखिल गुप्ता की कहानी तो धुंध में है, लेकिन जब दुनिया में धराए CIA एजेंट...

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA दुनिया भर में खुफिया ऑपरेशन करती रही है. ऐसे अनेक मौके आए जब उसके जासूस और एजेंट रंगे हाथ ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पकड़े गए. ऐसे मौकों पर अमेरिका ने बड़ी बेशर्मी से पूरी कहानी ही बदल दी. एक बार सोवियत रूस ने जब अमेरिका के जासूसी प्लेन को गिरा दिया तो अमेरिका ने तो यह कह दिया था कि NASA के लिए काम रहा विमान था जो मौसम से जुड़ी जानकारी जुटा रहा था. लेकिन सबूतों के आगे US तिलमिला कर रह गया.

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US न्याय विभाग ने निखिल गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं. (Photo: ITG)
US न्याय विभाग ने निखिल गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं. (Photo: ITG)

अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट का दावा है कि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता 2023 में एक मर्डर-फॉर-हायर साजिश में शामिल थे. अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया कि गुप्ता ने खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची. अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार शुक्रवार को न्यूयॉर्क में निखिल गुप्ता ने अमेरिकी जज सारा नेटबर्न के सामने पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश रचने के आरोप में दोष को स्वीकार किया है.

गुरपतवंत सिंह पन्नू  खालिस्तानी आतंकी है. वह अमेरिकी नागरिक हैं और खालिस्तान समर्थक हैं. भारत सरकार ऐसे किसी भी ऑपरेशन में इंडियन स्टेट की भागीदारी से साफ इनकार करती है. 

कुख्यात ऑपरेशनों के लिए बदनाम CIA 

निखिल गुप्ता की कहानी तो अभी रहस्यों के धुंध में हैं. लेकिन दुनिया में ऐसे कई उदाहरण हैं जब अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एजेंट गुप्त ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पकड़े गुए. ये घटनाएं मुख्य रूप से कोल्ड वॉर के समय से लेकर हाल के वर्षों तक की हैं. इनमें जासूसी, घुसपैठ या इंटेलिजेंस गैदरिंग शामिल थी. अमेरिकी सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह है कि ऐसे सभी ऑपरेशन और एजेंटों की जानकारी CIA के वेबसाइट पर हासिल की जा सकती है. 

जब पकड़े गए CIA एजेंट, एक्सपोज हुआ अमेरिका


द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिका ने दुनिया में अपने रोल को नंबर वन के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया. तब इस कथित नंबर वन अमेरिका की टक्कर साम्यवादी खेमे के सोवियत रूप से हो रही थी. 1945 के बाद दोनों देशों के बीच न सिर्फ ऑर्म्स रेस शुरू हुआ बल्कि जासूसी ऑपरेशन, काउंटर इंटेलिजेंस का तगड़ा दौर भी शुरू हुआ. इस दौरान कई बार CIA एजेंट पकड़े गए और दुनिया के सामने अमेरिका की काली करतूरत एक्सपोज हो गई. इससे पता चलता था कि अमेरिका कैसे अंतर्राष्ट्रीय नियमों, दूसरे देशों का की संप्रभुता का खुल्लमखुल्ला हनन कर अपनी मनमानी करता था.

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1. फ्रांसिस गैरी पॉवर्स, साल: 1960, देश- सोवियत रूस

फ्रांसिस गैरी पॉवर्स CIA का जासूस था और अमेरिकी सेना का पायलट था.  1 मई 1960 के दिन CIA के लिए काम करने वाले 30 साल पॉवर्स ने पाकिस्तान के पेशावर एयरबेस से लॉकहीड U-2 जासूसी विमान उड़ाया. 

इसका मिशन था सोवियत संघ के ऊपर से गुजरते हुए मिसाइल साइट्स, सैन्य ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन फोटोग्राफी करना. ये विमान 70,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता था, इस ऊंचाई को सोवियत डिफेंस सिस्टम की पहुंच से बाहर माना जाता था।. उड़ान के दौरान उराल पर्वतों के पास स्वेर्दलोव्स्क (अब येकातेरिनबर्ग) के ऊपर सोवियत एयर डिफेंस ने नई SA-2 सरफेस-टू-एयर मिसाइलें दागीं.

रिपोर्ट्स के अनुसार 14 मिसाइलें फायर की गईं, लेकिन एक मिसाइल विमान के पीछे फट गई, जिससे U-2 को गंभीर नुकसान पहुंचा और यह अनियंत्रित हो गया. पॉवर्स ने पैराशूट से कूदने की कोशिश की लेकिन ऑक्सीजन होस से उलझ गए. आखिरकार वे 15,000 फीट पर कूद पाए और सुरक्षित उतरे. 

जमीन पर पहुंचते ही रूस की खुफिया एजेंसी KGB के एजेंटों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. विमान का बड़ा हिस्सा अब भी साबूत बचा था. जिसमें कैमरा, फिल्म और अन्य जासूसी उपकरण थे. सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने 5 मई को घटना की घोषणा की और 7 मई को पॉवर्स के जीवित होने और उसके कबूलनामे का खुलासा किया. 

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अमेरिका ने पहले तो इसे NASA का मौसम अनुसंधान विमान बताया, लेकिन सबूतों के सामने सुपर पावर का झूठ उजागर हो गया. पॉवर्स को जासूसी के आरोप में अगस्त 1960 में एक शो ट्रायल में 10 साल की सजा दी गई. लेकेन वो 21 महीने तक ही कैद में रहा और फरवरी 1962 में बर्लिन में सोवियत जासूस रुडोल्फ एबेल के साथ स्पाई एक्सचेंज में रिहा हुआ. 

2. विलियम फ्रांसिस बकले, साल: 1984, स्थान- लेबनान 

विलियम फ्रांसिस बकले एक अनुभवी अमेरिकी सेना विशेष बल अधिकारी और CIA के वरिष्ठ अधिकारी था. वह कोरिया और वियतनाम युद्ध में हिस्सा ले चुका था. 

 1983 में लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर बम हमले के बाद विलियम फ्रांसिस बकले ने स्वेच्छा से बेरूत में CIA स्टेशन चीफ का पद संभाला. बता दें कि इस हमले में CIA के कई अफसर मारे गए थे. बेरूत में उनकी 'कवर पोस्टिंग' बतौर पॉलिटिकल ऑफिसर था. लेबनान में बकले का काम CIA के नेटवर्क को दोबारा मजबूत करना. 

16 मार्च 1984 की सुबह बकले अपने अपार्टमेंट से काम पर जा रहे था, जब हिजबुल्लाहके आतंकवादियों ने उसे घेर लिया. दो कारों ने उनकी गाड़ी को ब्लॉक किया और AK-47 से लैस हमलावरों ने उन्हें अगवा कर लिया.  यह CIA स्टेशन चीफ का इतिहास में एकमात्र ज्ञात अपहरण था. अगले 14-15 महीनों तक उन्हें क्रूर यातनाएं दी गईं. उन्हें ड्र्ग्स इंजेक्ट किया गया, शारीरिक प्रताड़ना दी गई और पूछताछ की गई. 

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बकले ने 400 पेज का बयान दिया, लेकिन आखिरकार यातना से उसकी मौत हो गई. यह घटना CIA के लिए बड़ा झटका थी, इसके बाद CIA ने  लेबनान में इंटेलिजेंस ऑपरेशन्स को लगभग बंद कर दिया. 

3.एल्ड्रिच एम्स, वर्ष: 1994  

एल्ड्रिच एम्स CIA का एक वरिष्ठ अधिकारी था. लेकिन वह डबल एजेंट निकल गया और सोवियत रूस की जासूसी करने लगा. एम्स ने CIA के कई गुप्त ऑपरेशन्स और एजेंट्स की जानकारी लीक की, जिससे कई अमेरिकी जासूसों की मौत हुई. FBI और CIA की जांच के बाद उसे गिरफ्तार किया गया. एम्स अमेरिकी इतिहास के सबसे खतरनाक मोल्स में से एक साबित हआ. उसे आजीवन कारावास की सजा मिली. 


4. घोलामरेजा होसेनी, साल: 2010, स्थान- ईरान

घोलामरेजा होसेनी CIA के लिए काम करने वाला एक ईरानी नागरिक था. ये शख्स गुप्त कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए अमेरिका को इंटेलिजेंस से जुड़ी सूचनाएं भेज रहा था.

2007 में होसेनी ने CIA को ईरान के नाभिकीय कार्यक्रम जैसी संवेदनशील जानकारी भेजने का प्रस्ताव दिया. CIA ने उन्हें IranGoals.com जैसे कवर वेबसाइटों के ज़रिए उनसे संपर्क बनाने को कहा. 

 CIA के एक दोषपूर्ण कोवर्ट कम्युनिकेशन टूल के कारण ईरानी इंटेलिजेंस ने उन्हें ट्रैक किया और तेहरान एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया.  यह मामला CIA के कई इंफॉर्मेंट्स के कैप्चर का हिस्सा था, जो तकनीकी खामियों से जुड़ा था. गिरफ्तारी के समय इस शख्स ने अपने पास रखे जानकारी वाले मेमोरी कार्ड को चबाकर निगल लिया, क्योंकि उसे पकड़े जाने का डर था. होसेनी को ईरानी अदालत में पकड़े जाने के बाद जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें करीब 10 साल से ज़्यादा जेल में रखा गया. 

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5. रेमंड डेविस, साल: 2011, स्थान- पाकिस्तान 

रेमंड डेविस CIA का एक कॉन्ट्रैक्टर था. एक शख्स पाकिस्तान में गुप्त निगरानी मिशन था. एक दिन डेविस ने अपने लिए खतरा मानने वाले दो पाकिस्तानी नागरिकों को गोली मारकर हत्या कर दी. इसक बाद पाकिस्तानी एजेंसियों ने रेमंड डेविस को गिरफ्तार कर लिया. यह घटना अंतरराष्ट्रीय विवाद का कारण बनी, और अमेरिका ने उन्हें रिहा कराने के लिए डिप्लोमैटिक प्रयास किए.  बाद में उन्हें 'ब्लड मनी' देकर रिहा कराया गया. 
 

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