मोस्ताकुर रहमान को देश के केंद्रीय बैंक 'बांग्लादेश बैंक' का गवर्नर बनाए जाने के फैसले से बांग्लादेश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख और विपक्षी नेता शफीकुर रहमान ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए इसे 'सरकार समर्थित मॉब कल्चर की औपचारिक शुरुआत' बताया.
वहीं, अंतरिम सरकार के दौरान नियुक्त गवर्नर अहसान हबीब मंसूर के कार्यकाल को अचानक समाप्त कर मोस्ताकुर की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठे हैं. मंसूर ने बुधवार को मीडिया से कहा, 'मैंने न तो इस्तीफा दिया है और न ही मुझे औपचारिक रूप से हटाया गया. मुझे यह खबर मीडिया से पता चली और मैं घर जा रहा हूं.'
अब तक बैंकर्स या अर्थशास्त्रियों को मिलता था पद
मोस्ताकुर की नियुक्ति बांग्लादेश की परंपरा से अलग मानी जा रही है, क्योंकि अब तक यह पद आम तौर पर केंद्रीय बैंकर्स, अर्थशास्त्रियों या वरिष्ठ नौकरशाहों को मिलता रहा है. मोस्ताकुर एक कारोबारी हैं और देश के बड़े गारमेंट सेक्टर से जुड़े हैं, जिनके पास बैंकिंग का अनुभव नहीं है. साथ ही उनके ऊपर लोन डिफॉल्टर का इतिहास होने की बात भी सामने आई है.
कई लोगों के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी संवेदनशील बनी क्योंकि यह मंसूर को अचानक हटाने के बाद की गई, जिन्हें एक सम्मानित अर्थशास्त्री माना जाता है और जिन्होंने अवामी लीग सरकार के पतन के बाद के कठिन दौर में देश की मुद्रा और विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने में भूमिका निभाई थी. मंसूर को 2028 में पूरा होने वाले कार्यकाल से पहले हटा दिया गया और उन्होंने खुद बताया कि उन्हें इसकी जानकारी आधिकारिक रूप से नहीं बल्कि टीवी समाचारों से मिली.
कौन हैं मोस्ताकुर रहमान?
रिपोर्ट के अनुसार मोस्ताकुर रहमान पेशे से कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट हैं और गारमेंट उद्यमी के रूप में हेरा स्वेटर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं. वह बीएनपी की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति में भी रह चुके हैं और कई व्यावसायिक संगठनों के सदस्य रहे हैं. उन्होंने नियामक संस्थाओं के साथ भी काम किया है और बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की स्थायी समिति की अध्यक्षता भी की है.
क्यों विवादों में है मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति?
उनकी नियुक्ति को विवादित बनाने वाले प्रमुख कारणों में पहला उनका लोन डिफॉल्ट से जुड़ा रिकॉर्ड बताया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक म्यूचुअल ट्रस्ट बैंक ने हेरा स्वेटर्स के 89 करोड़ टका के लोन को उनकी नियुक्ति से कुछ महीने पहले रिशेड्यूल किया था और विशेष नीति के तहत 10 साल की अवधि और दो साल की मोहलत दी गई. बैंकिंग क्षेत्र के कई अधिकारियों ने सवाल उठाया कि विशेष शर्तों पर अपने लोन रिशेड्यूल कराने वाला व्यक्ति देश के बैंकिंग हितों की रक्षा कैसे करेगा. सोशल मीडिया पर भी उनके नाम के साथ 860 मिलियन टका के लोन डिफॉल्ट की चर्चा हुई.
2028 तक था मंसूर का कार्यकाल
दूसरा विवाद उनकी नियुक्ति की परिस्थितियों को लेकर है. रिपोर्ट के अनुसार मंसूर को हटाने से पहले कुछ अधिकारियों ने उनके 'सत्तावादी व्यवहार' का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था, जिसे मंसूर ने साजिश बताया. इसके बाद वित्तीय संस्थान प्रभाग ने अगस्त 2028 तक चलने वाले उनके कार्यकाल के शेष हिस्से को रद्द कर दिया, जबकि उन्हें 2024 में चार साल के लिए नियुक्त किया गया था.