ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम टोनी एबॉट को रानी लक्ष्मीबाई की ओर से ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लिखी ऑस्ट्रेलियाई वकील जॉन लांग की याचिका भेंट की. मोदी ने इसे से ठीक पहले एबॉट को भेंट किया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैय्यद अकबरूद्दीन ने ट्वीट किया, 'प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को ऑस्ट्रेलियाई जॉन लांग द्वारा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की ओर से ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ 1854 में लिखी याचिका की मूल प्रति भेंट की.
PM gifts Australian PM a memorial of Australian John Lang on behalf of Rani of Jhansi against East India Company 1/2
— Syed Akbaruddin (@MEAIndia)
John Lang's Original petition of 1854 on behalf of Jhansi ki Rani against the East India Company.
— Syed Akbaruddin (@MEAIndia)
Who was John Lang? Check this out.
— Syed Akbaruddin (@MEAIndia)
की ओर से एबॉट को दिए गए इस उपहार के जरिये भारतीय इतिहास में जॉन लांग का योगदान दिखाई देता है. लांग का जन्म 1816 में सिडनी में हुआ था और उन्हें ऑस्ट्रेलिया का पहला मूल उपन्यासकार माना जाता है. लांग कई प्रतिभाओं के धनी थे. वह एक वकील के साथ पत्रकार और जन्मजात मुसाफिर थे.
लांग 1842 में भारत गए और उसे अपना घर बना लिया. उन्होंने भारतीय भाषा सीखी और वकालत के पेशे को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया. उन्होंने मेरठ से ‘द मुफस्सीलाइट’ और बाद में मसूरी से भी अखबार भी शुरू किया. इस अखबार में ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियों की आलोचना भी होती थी जिसके लिए उन्हें कुछ समय के लिए जेल में भी रहना पड़ा.
1854 में लांग ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के वकील के रूप में काम किया और ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई में रानी लक्ष्मीबाई का प्रतिनिधित्व किया.
इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई संसद के परिसर में मोदी ने सलामी गारद का निरीक्षण किया. उनके सम्मान में 19 तोपों की सलामी भी दी गई. इस मौके पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री और कई भारतीय मौजूद थे.
- इनपुट भाषा