अमेरिका और इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध दूसरे महीने में प्रवेश कर रहा है और दुनिया एक ऐसे संकट में फंसती जा रही है जिससे निकलने में युद्ध खत्म होने के बाद भी महीनों लग सकते हैं. दुनिया के देश तेल और गैस की किल्लत झेल रहे हैं और सप्लाई में रुकावट की वजह से इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं. इस बीच पाकिस्तान को भी भारी नुकसान हो रहा है जो खाड़ी देशों से तेल और गैस खरीदता है.
पाकिस्तान को हाल ही में ईरान ने भरोसा दिया है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट से उसके 20 जहाज सुरक्षित गुजर सकते हैं. इस भरोसे के बाद पाकिस्तान ने कुवैत से डीजल और जेट ईंधन मांगा है. पाकिस्तान ने कुवैत से कहा कि वो सप्लाई ले जाने के लिए अपने जहाज लेकर भी आएगा जिसके बाद कुवैत राजी हो गया है.
अमेरिका और इजरायल से जंग के बीच ईरान ने तेल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है और चुनिंदा देशों के जहाजों को ही होर्मुज से गुजरने दे रहा है.
कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (KPC) पाकिस्तान स्टेट ऑयल के साथ समझौते के तहत नियमित रूप से पाकिस्तान को तेल भेजता रहा है. हालांकि, अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज बंद कर दिया है जिससे तेल की सप्लाई रुक गई है.
पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' से बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, 'अब पाकिस्तान ने कुवैत को बताया है कि ईरान ने शिपमेंट के लिए रास्ता साफ कर दिया है, इसलिए पाकिस्तानी जहाज खाड़ी देश से तेल ला सकते हैं. इसके जवाब में कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने अपनी सहमति दे दी है.'
सोमवार को पाकिस्तान के पेट्रोलियम मामलों के मंत्री परवेज मलिक ने कुवैत के राजदूत नासिर अब्दुलरहमान जासेर अलमुतैरी के साथ बैठक की, जिसमें द्विपक्षीय संबंध, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई.
इस दौरान अली परवेज ने कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की सराहना करते हुए कहा कि उसने पाकिस्तान के जहाजों को कुवैत से डीजल और जेट ईंधन लाने में पूरी सुविधा देने का भरोसा दिया है.
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा ईरान
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर अधिक कंट्रोल स्थापित करने की कोशिश में ईरान की संसदीय सुरक्षा समिति ने एक प्लान को मंजूरी दी है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, प्लान में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने और अमेरिकी व इजरायली जहाजों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने जैसे प्रावधान शामिल हैं.
राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के एक सदस्य ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस प्लान का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, जहाजों की सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल, पर्यावरण संरक्षण उपाय और टोल सिस्टम लागू करना है.
अमेरिका और इजरायल के अलावा, इस प्लान का उद्देश्य उन सभी देशों के जहाजों को भी रोकना है जिन्होंने ईरान के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंध लगाए हैं.
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को आंशिक रूप से बंद करने की घोषणा की थी.
इस कदम से वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया, क्योंकि यह रास्ता दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है. दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. इसके बंद होने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई और कई देश प्रभावित हुए.
इसका असर भारत पर भी पड़ा, जहां लगभग 90% एलपीजी आयात इसी मार्ग से होता है. सप्लाई में कमी के कारण छोटे दुकानदारों से लेकर रेस्टोरेंट मालिकों तक, बड़ी आबादी प्रभावित हुई है.
हालांकि, कुछ समय बाद स्थिति में सुधार हुआ और ईरान ने ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ जैसे कई जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी. ये जहाज कुछ हफ्ते पहले भारत पहुंच गए.