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इस बार भाई नहीं, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम की बहन भड़कीं, ट्रंप को साफ-साफ चेताया

ईरान जंग के बीच अमेरिका के कट्टर दुश्मन उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बहन ने अमेरिका को जली कटी सुनाई है. किम की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका को खतरनाक इंटरनेशनल बदमाश कहा है. अमूमन कम बोलने वाली किम की बहन ने कहा कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा पर किसी भी खतरे का नतीजा भयंकर होगा.

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किम जोंग की बहन ईरान जंग पर प्रतिक्रिया दी है. (Photo: AP)
किम जोंग की बहन ईरान जंग पर प्रतिक्रिया दी है. (Photo: AP)

ईरान जंग के नाजुक मौके पर किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने कहा है कि अगर उत्तर कोरिया की सुरक्षा को किसी तरह की चुनौती मिलती है तो इसके नतीजे थर्रा देने वाले होंगे. नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग उन की राजनीतिक रूप से शक्तिशाली बहन अमूमन अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर कम ही बोलती है, लेकिन ईरान जंग के बीच भाई को पीछे छोड़कर आगे आना अहम संदेश है. 

मंगलवार को किम यो जोंग का बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने हजारों सैनिकों के साथ 11 दिन की फ्रीडम शील्ड एक्सरसाइज शुरू की है. इसके अलावा ये बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान पश्चिम एशिया में झुकने को तैयार नहीं है.

18 हजार दक्षिण कोरियाई सैनिकों के साथ US का अभ्यास

उत्तर कोरिया के इस बयान का संदर्भ समझना जरूरी है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से सैन्य अभ्यास कर रहे हैं. इसका नाम फ्रीडम शील्ड 2026 है. यह अभ्यास 9 मार्च 2026 को शुरू हुआ और 19 मार्च 2026 तक चलेगा यानी कुल 11 दिन. दक्षिण कोरिया की सेना के करीब 18000 सैनिक इसमें हिस्सा ले रहे हैं. अमेरिका की तरफ से सैनिकों की सही संख्या बताई नहीं गई है लेकिन हजारों में है. 

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यह मुख्य रूप से कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित कमांड पोस्ट एक्सरसाइज है जिसमें युद्ध के सभी क्षेत्रों जैसे जमीन हवा समुद्र साइबर और स्पेस को शामिल किया गया है. इसके साथ ही 22 फील्ड ट्रेनिंग ड्रिल्स भी हो रही हैं. 

यह एक्सरसाइज पूरे दक्षिण कोरिया में फैली हुई है. मुख्य कमांड पोस्ट और सिमुलेशन आधारित हिस्सा कैंप हम्फ्रीज में चल रहा है. 

खतरनाक इंटरनेशनल बदमाशों की लापरवाही भरी हरकतें

ईरान युद्ध का सीधे जिक्र किए बिना किम यो योंग ने कहा कि, "US-साउथ कोरिया की ड्रिल ऐसे समय में इस क्षेत्र की स्थिरता को कमजोर करती है जब ग्लोबल सिक्योरिटी का ढांचा तेजी से टूट रहा है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में खतरनाक इंटरनेशनल बदमाशों की लापरवाही भरी हरकतों की वजह से युद्ध छिड़ रहे हैं. किम यो जोंग ने outrageous international rogues शब्द का इस्तेमाल किया.

फ़्रीडम शील्ड अमेरिका और साउथ कोरिया की सेनाओं द्वारा की जाने वाली दो सालाना कमांड-पोस्ट एक्सरसाइज़ में से एक है. ज्यादातर कंप्यूटर-सिम्युलेटेड ड्रिल्स को सहयोगी देशों की जॉइंट ऑपरेशनल क्षमताओं को टेस्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, साथ ही इसमें बदलते युद्ध के हालात और सिक्योरिटी चुनौतियों को भी शामिल किया गया है.  हमेशा की तरह फ़्रीडम शील्ड के साथ वॉरियर शील्ड नाम का एक फ़ील्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम भी होगा. 

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देश के बढ़ते न्यूक्लियर प्रोग्राम का ज़िक्र करते हुए किम यो जोंग ने कहा कि नॉर्थ कोरिया बाहरी खतरों के खिलाफ अपनी "विध्वंसक शक्ति" को मजबूत करना जारी रखेगा और "लगातार और बार-बार दुश्मनों को हमारी युद्ध रोकने की ताकत और इसके खतरनाक परिणामों का यकीन दिलाता रहेगा."

नॉर्थ कोरिया ने लंबे समय से पड़ोसियों की जॉइंट ड्रिल को हमले की रिहर्सल बताया है और अक्सर उन्हें अपने मिलिट्री डेमोंस्ट्रेशन या हथियारों के टेस्ट को बढ़ाने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया है. जबकि उत्तर कोरिया के विरोधियों का कहना है कि ये एक्सरसाइज डिफेंसिव हैं.

एंटी-डिफेंस हथियार रिलोकेट कर सकता है US

इस बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने माना कि अमेरिका "कुछ एंटी-डिफेंस हथियार" दूसरी जगह ले जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम नॉर्थ कोरिया के खिलाफ डिफेंस को गंभीर रूप से कमजोर नहीं करेंगे. उनकी यह टिप्पणी मीडिया में इस अटकल के बाद आई कि यूनाइटेड स्टेट्स मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन को सपोर्ट करने के लिए साउथ कोरिया से कुछ पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और दूसरे जंगी साजो सामान को ले जा रहा है.

ली ने कैबिनेट मीटिंग में कहा, "हमारी सरकार ने ऐसे कदमों का विरोध किया है, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि हम अपनी इच्छा के अनुसार स्थिति को पूरी तरह से कंट्रोल नहीं कर सकते."

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उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ईरान पर US और इजरायल के हमलों को "नकली शांति" स्थापित करने के बहाने किया गया "गैर-कानूनी हमला" बताया था.

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी विदेश नीति को नए कोल्ड वॉर के आइडिया के आस-पास बनाया है. उन्होंने मॉस्को और बीजिंग के साथ रिश्ते गहरे किए हैं, जबकि प्योंगयांग को वॉशिंगटन के खिलाफ एक एकजुट मोर्चे का हिस्सा बताया है. 

प्योंगयांग और तेहरान उन कुछ सरकारों में से थे जिन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर हमले का समर्थन किया था. 
 

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