उत्तरी जापान में सोमवार को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.5 रही. भूकंप के बाद सुनामी का भी अलर्ट जारी किया गया. हालात का अंदेशा इसी से जताया जा सकता है कि प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का आदेश दिया.
उत्तरी जापान के सानरिकु तट के पास वहां के समयानुसार सोमवार शाम लगभग पांच बजे भूकंप आया. इसका केंद्र समुद्र की सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे था. प्रशासन ने बड़ी सुनामी की आशंका जताई है. लेकिन भूकंप के बाद इवाते प्रांत के कुजी बंदरगाह पर सुनामी की लगभग 80 सेंटीमीटर ऊंची लहर दर्ज की गई.
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- भूकंप के बाद टोक्यो स्टेशन और शिन-आओमोरी स्टेशन के बीच तोहोकू शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया. ऑपरेटर ने बताया कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया.
- यामागाता और अकिता शिंकानसेन सेवाएं भी बंद की गईं. इवाते प्रांत में सभी लोकल ट्रेन सेवाएं रोकी गईं. होक्काइदो में कुछ लोकल लाइनें भी बंद हैं. शिन-चितोसे और सेंडाई एयरपोर्ट के ऑपरेटरों ने कहा कि भूकंप के बावजूद उनकी सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा.
- प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने का अनुरोध किया है. अगले एक हफ्ते तक आफ्टरशॉक की चेतावनी दी गई है. इवाते में लगभग 10 फीट ऊंची सुनामी की आशंका जताई गई है. इवाते, आओमोरी और दक्षिण-पूर्वी होक्काइडो में सुनामी अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मियागी और फुकुशिमा के तटों के लिए हल्की सुनामी सलाह जारी की गई है.
बता दें कि इससे पहले दिसंबर में आए 7.5 तीव्रता के भूकंप में दर्जनों लोग घायल हुए थे. इससे पहले 11 मार्च 2011 को आए 9.0 तीव्रता के भूकंप आया था, जिसने उत्तरी जापान के बड़े हिस्सों को तबाह कर दिया था. इसमें 22,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और लगभग पांच लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था. इसी दौरान फुकुशिमा में सुनामी से प्रभावित फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र से निकले विकिरण के कारण लगभग 1,60,000 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे.
मेगा भूकंप की अटकलें!
जापान में 7.5 तीव्रता के इस भूकंप के बाद यह अटकलें लगने लगी हैं कि इसके बाद जापान में मेगा भूकंप आ सकता है. जब भी इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप आता है, तो ऐसे संभावित मेगा भूकंप को लेकर चिंता बढ़ जाती है.
बता दें कि रिक्टर स्केल पर 8.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को मेगा भूकंप माना जाता है. ऐसे भूकंप आमतौर पर तब आते हैं जब एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी के नीचे खिसकती है, जिसे सबडक्शन जोन कहा जाता है. हालांकि, आज का 7.4 तीव्रता वाला भूकंप इस श्रेणी में नहीं आता.
हालांकि, जापान की चेतावनी संबंधी गाइडलाइंस के अनुसार, 7 तीव्रता के भूकंप के बाद एक सप्ताह के भीतर किसी बड़े भूकंप के आने की संभावना लगभग कई सौ मामलों में एक बार होती है.
समाचार एजेंसी एएफपी ने पहले रिपोर्ट किया था कि जापान की केंद्र सरकार ने 2022 में अनुमान लगाया था कि अगले 30 वर्षों में इस स्तर का भूकंप आने की संभावना लगभग 70 फीसदी है.
जापान दुनिया के उन मुल्कों की लिस्ट में है, जहां सबसे अधिक भूकंप आते हैं. दुनिया के लगभग 10 फीसदी भूकंप यहीं आते हैं. इसका कारण जापान की जियोलॉजी है. जापान चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स पैसिफिक, फिलीपीन सागर, यूरेशियन और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट के बीच स्थित है, जहां ये प्लेटें आपस में टकराती और खिसकती रहती हैं, जिससे बार-बार भूकंप आते हैं.