
तारीख, 7 अक्टूबर 2023... इजरायल पर फिलीस्तीनी आतंकवादी समूह हमास (Israel-Hamas Conflict) ने अचानक से हमला कर दिया. हजारों रॉकेट्स दागे गए. चारों तरफ चीख पुकार और दहशत का मंजर था. लोग अपनी जान बचाने के लिए यहां वहां जाने लगे. लेकिन हमास के आतंकवादियों ने फिर भी बर्बरता दिखाते हुए कई लोगों को बंधक बना लिया.
उधर इजरायल भी कहां चुप बैठने वाला था. उसने भी आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. हमास के नियंत्रण वाले गाजा में इजरायली वायुसेना ने ताबड़तोड़ हमले किए. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास हमले के बाद एक वीडियो मैसेज जारी किया. इसमें उन्होंने चेतावानी दी कि इजरायल को निशाना बनाने वाले एक भी आतंकी को छोड़ा नहीं जाएगा. न तो हमास और न ही इजरायल, कोई भी अब झुकने को तैयार नहीं है. जंग अभी जारी है. हमास-इजरायल जंग में अब तक 1,200 लोगों के मारे जाने की खबर है.
आखिर ये हमास है क्या, जिसने इजरायल के अभेद्य माने जाने वाले सुरक्षा चक्र की धज्जियां उड़ा दीं. हमास का मतलब है हरकतुल मुकावमतुल इस्लामिया या इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन. ये फिलिस्तीनी सुन्नी मुसलमानों की एक सशस्त्र संस्था है. इसका गठन 1987 में हुआ. इसमें 20 हजार से लेकर 25 हजार के करीब मेंबर हैं. इसका गठन मिस्र और फिलिस्तीन ने मिलकर किया था. इसका मकसद फिलिस्तीन में इस्लामिक शासन लाना और इजरायल का विनाश करना है.

क्या सच में ईरान करता है हमास की मदद?
दुनिया हमास को फिलिस्तीनी आतंकी संगठन के रूप में जानती है, जिसका गाजा पट्टी पर कब्जा है. कई एक्सपर्ट्स दावा करते हैं कि इस आतंकी संगठन को ईरान से समर्थन प्राप्त है. उसी ने इजरायल पर हमले के लिए हमास की मदद की है. ईरान इसके लिए फंडिंग भी करता है. इसके अलावा इसे हथियार भी उपलब्ध करवाता है और इन्हें स्पेशल ट्रेनिंग भी देता है.
बता दें, हमास का कब्जा गाजा पट्टी पर है. गाजा पट्टी करीब 10 किलोमीटर चौड़ी है. और इसका इलाका 41 किलोमीटर लंबा है. यहां 22 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. साल 2006 के फिलिस्तीनी विधायी चुनावों में जीत हासिल करने के बाद इसने 2007 में अपने प्रतिद्वंदी फतह के साथ हिंसक संघर्ष के बाद गाजा पर कब्जा कर लिया.

कई बड़े देश कर चुके हैं हमास को आतंकवादी संगठन घोषित
तभी से हमास गाजा पर राज कर रहा है. हमास पिछले कुछ सालों में इजरायल के ठिकानों पर कई हमले कर चुका है, जिनमें आत्मघाती बम विस्फोट और रॉकेट लॉन्च सहित कई हमले शामिल हैं. इन हमलों में हमास और इजरायली दोनों ही लोगों की जान बड़ी संख्या में जा चुकी है. इजरायल, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और ब्रिटेन जैसे कई देश हमास को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं. हालांकि, हमास को आतंकवादी समूह घोषित करने का प्रस्ताव 2018 में संयुक्त राष्ट्र में पारित होने में विफल रहा है.
रिपोर्ट्स की मानें तो हमास इजरायल से काफी कमजोर है. लेकिन इसे कम आंकना भूल होगी. हमास के पास ड्रोन, रॉकेट और मोर्टार से लेकर कई हथियार हैं. हमास अपने हमले में सटीक निर्देशित एंटी टैंक मिसायलों का भी इस्तेमाल करता है. हमास मुख्य रूप से गाजा पट्टी में हथियार बनाता है. इजरायल का भी मानना है कि उसका 'आका' ईरान है. वही उसकी मदद करता है.

ईरान ने किया हमास की मदद से साफ इनकार
हालांकि, ईरान इस बात से इनकार कर रहा है कि उसने हमास की कोई मदद नहीं है. ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने खुद इस बात की पुष्टि की है. इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि कम से कम ईरान को हमास के हमले की निंदा करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई. आयतुल्लाह ने इस पर कहा कि हमने सिर्फ हमास का समर्थन किया है. लेकिन इजरायल हमले से हमारा कोई भी लेना देना नहीं है.
अमेरिका ने कहा कि नहीं मिले ईरान के खिलाफ कोई सबूत
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने भी कहा है कि उसने अब तक ऐसे सबूत नहीं देखे हैं जो ये बताते हों कि ईरान इन हमलों के पीछे था. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हमास और ईरान के बीच लंबे रिश्ते होने की बात जरूर कही है. ईरान कई सालों तक फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास का मुख्य वित्त पोषक रहा है. ईरान इस संगठन को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं भारी संख्या में हथियार और रॉकेट भी देता रहा है.

ऐसे में इजराइल पिछले कई सालों से उस मार्ग को बाधित करने की कोशिश कर रहा है जिसके जरिए चीजें ईरान से गाजा पट्टी तक पहुंचती हैं. इनमें सूडान, यमन से लेकर लाल सागर के जहाजों और सिनाई प्रायद्वीप में सक्रिय बद्दू तस्कर शामिल हैं. इजरायल के धुर दुश्मन होने के नाते यहूदी राज्य को नुकसान पहुंचना ईरानी हित में है.
उधर, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भी मंगलवार को कहा कि 10 अक्टूबर तक अमेरिकी खुफिया जानकारी से यह संकेत नहीं मिला है कि ईरान को इजरायल पर हमास के हमले के बारे में कुछ भी पता था. या उसकी इस जंग में कोई भूमिका है.
'हमले का 75 फीसदी फैसला हमास का'
वहीं, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हाइम तोमेर ने कहा कि ये सोचना बहुत ज्यादा नहीं होगा कि ईरान इसमें शामिल है. ये इजराइल और सऊदी अरब के बीच होने जा रहे शांति समझौते से जुड़ी खबरों पर ईरान की प्रतिक्रिया है. फिर भी इस बात से इत्तेफाक रखना मुश्किल है कि ईरान ने शनिवार के हमलों का आदेश दिया होगा.''

तोमेर ने कहा, ''ये सही है कि हमास को हथियार ईरान से मिलते हैं. ये भी सही है कि ईरान सीरिया में हमास को ट्रेनिंग देता है. यहां तक कि ईरान के भीतर भी हमास के लड़ाकों को ट्रेनिंग दी जाती है. हाल की महीनों में इसराइल ने हमास के अधिकारियों के मूवमेंट को ट्रेक किया है. हमने हमास के मिलिट्री विंग के प्रमुख सालेह अल-अरूरी और हमास के अन्य अधिकारियों को ईरान और लेबनान जाते देखा है. इन लोगों ने वहां बैठकें की है. इजराइल को खबर है कि इनमें से कुछ लोग आयतुल्ला खामेनेई से भी मिले. लेकिन ये ‘नजदीकी रिश्ते’ भी हमले की टाइमिंग का जवाब नहीं दे रहे. हमास की नजर इजराइल के भीतर सियासी संघर्ष पर थी. ईरान ने हमास की हथियारों और उपकरणों से खूब मदद की है. लेकिन मेरे विचार से शनिवार के हमले का फैसला 75% फैसला हमास ने किया था.”