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लेबनान की जमीन पर नजर गड़ाए बैठे हैं इजरायली, खुद बताया कब्जे का प्लान

इजरायल के एक दक्षिणपंथी समूह ने दक्षिण लेबनान में स्थायी बस्तियां बसाने की खुलकर वकालत की है. समूह का कहना है कि पहले इजरायली सेना इलाके को खाली कराएगी और फिर वहां इजरायली नागरिकों को बसाया जाएगा.

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लेबनान में इजरायली सेना लगातार बमबारी कर रही है. (Photo: Reuters)
लेबनान में इजरायली सेना लगातार बमबारी कर रही है. (Photo: Reuters)

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष में अब दक्षिण लेबनान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. इजरायल के दक्षिणपंथी सेटलर समूहों के कुछ लोग खुलकर यह कहने लगे हैं कि दक्षिण लेबनान के हिस्सों पर स्थायी इजरायली कब्जा होना चाहिए और वहां इजरायली नागरिकों को बसाया जाना चाहिए.

ऐसा ही एक समूह है "उरी त्जाफोन" यानी "अवेक, नॉर्थ विंड". इस संगठन की सह-संस्थापक अन्ना स्लाउटस्किन ने खुलकर कहा कि उनका लक्ष्य इजरायल की उत्तरी सीमा को लेबनान के भीतर बहने वाली लिटानी नदी तक बढ़ाना है. यह नदी लेबनान की सीमा के करीब 30 किलोमीटर अंदर तक जाती है.

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पेशे से रिसर्च बायोलॉजिस्ट अन्ना स्लाउटस्किन ने कहा कि यह आंदोलन 2024 से तेजी से बढ़ा है और इसमें दर्जनों परिवार शामिल हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि यह समूह दक्षिण लेबनान में इजरायली नागरिक की स्थायी मौजूदगी चाहता है.

रिसर्च बायोलॉजिस्ट ने कहा, "योजना यह है कि वहां की ज्यादातर आबादी भाग जाए, फिर हम सीमा को आगे बढ़ाएं और उन्हें वापस लौटने न दें. इसके बाद उस इलाके को आधिकारिक तौर पर इजरायल का हिस्सा घोषित कर दिया जाए."

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इजरायली सरकार से फिलहाल समर्थन नहीं!

रिपोर्ट के मुताबिक, स्लाउटस्किन ने यह आंदोलन अपने भाई इजरायल सोकोल की याद में शुरू किया था, जो 2024 में गाजा युद्ध के दौरान मारे गए थे. हालांकि, इजरायली सरकार ने अब तक सार्वजनिक रूप से दक्षिण लेबनान में बस्तियां बसाने की इस योजना का समर्थन नहीं किया है. लेकिन स्लाउटस्किन का दावा है कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई उसी दिशा में पहला कदम है.

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खलीज टाइम्स की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा, "अभी इजरायली सेना अंदर जाकर इलाकों पर कब्जा कर रही है और उन्हें खाली करा रही है. इसके बाद वहां से पीछे हटने के बजाय हमें वहां बस जाना है."

लेबनान के लाखों लोग विस्थापित हुए

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच महीनों से जारी संघर्ष की वजह से लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं. दक्षिण लेबनान के कई इलाकों में भारी तबाही हुई है और लगातार हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई का दौर जारी है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ऐसे विचारों को राजनीतिक समर्थन मिलता है तो इससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है. लेबनान पहले ही इजरायल पर अपनी जमीन पर हमले और कब्जे की कोशिशों के आरोप लगाता रहा है, जबकि इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है.

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