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'फिलिस्तीनी किलर' नाम से बदनाम ये पाकिस्तानी जनरल, 25 हजार लोगों की मौत का जिम्मेदार

इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री मोशे दयान के हवाले से पता चला है कि जॉर्डन के सुल्तान हुसैन ने 1970 में पाकिस्तान के जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक की मदद से हजारों फिलिस्तीनियों का कत्लेआम किया था. उस समय जिया उल हक एक ब्रिगेडियर थे जिन्होंने 25000 फिलिस्तीनियों के कत्ल में सुल्तान हुसैन की मदद की थी. 

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पाकिस्तान के पूर्व जनरल जिया उल हक
पाकिस्तान के पूर्व जनरल जिया उल हक

इजरायल और हमास के बीच जंग की वजह किसी से छिपी हुई नहीं है. लेकिन अगर इतिहास उठाकर देखेंगे तो पता चलेगा कि एक समय में जॉर्डन के सुल्तान रहे हुसैन ने सिर्फ 11 दिनों में इतना कत्लेआम मचाया था, जो इजरायल 20 सालों में भी नहीं मचा सका. इस कत्लेआम में सुल्तान हुसैन का साथ दिया, पाकिस्तान के पूर्व जनरल जिया उल हक ने. 

इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री मोशे दयान के हवाले से पता चला है कि जॉर्डन के सुल्तान हुसैन ने 1970 में पाकिस्तान के जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक की मदद से हजारों फिलिस्तीनियों का कत्लेआम किया था. उस समय जिया उल हक एक ब्रिगेडियर थे जिन्होंने 25000 फिलिस्तीनियों के कत्ल में सुल्तान हुसैन की मदद की थी. 

बाद में जिया उल हक पाकिस्तान के आर्मी चीफ बने और उन्होंने पाकिस्तान की सरकार का तख्तापलट कर दिया. इसके साथ ही वहां इस्लामिक शरिया कानून लागू किया. यह वही जिया उल हक थे, जिन्होंने ब्रिगेडियर के पद पर रहते हुए हजारों फिलिस्तीनियों की हत्या के लिए जॉर्डन के सुल्तान की मदद की थी. 

पाकिस्तान के लोगों ने फिलिस्तीनियों के नरसंहार में जिया उल हक की भूमिका को पाकिस्तान में उथल पुथल की शुरुआत के तौर पर देखा. इसके बाद से जिया उल हक को पाकिस्तान में 'फिलिस्तीन के हत्यारे' के तौर पर जाना जाने लगा. पाकिस्तान के सोशल साइंटिस्ट और ऑथर रजा नईम कहते हैं कि जिया उल हक ने इस नरसंहार में जॉर्डन की सेना की मदद की थी. 

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छह दिन का युद्ध और शरणार्थियों का लगा तांता

जॉर्डन की सेना ने 1967 के छह दिन के युद्ध में मिस्र का साथ देते हुए इजरायल पर धावा बोल दिया था. 1967 के युद्ध में सुल्तान हुसैन की अगुवाई में जॉर्डन, इजरायल से हार गया था. इसके बाद तीन लाख फिलिस्तीनी शरणार्थियों ने जॉर्डन नदी के आसपास के इलाकों में शरण ली. जॉर्डन एक तरीके से राजनीतिक और आर्थिक रूप से बर्बाद हो गया था.

1967 में इजरायल से जॉर्डन की हार के बाद फिलिस्तीनी लड़ाके सत्ता में आए और फिलीस्तीन ने खुद को समेटना शुरू किया. अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के वेटरन और अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सुरक्षा सलाहकार रह चुके ब्रूस रिडेल कहते हैं कि फिलिस्तीनी फिदायीन की ताकत बढ़ती गई. फिलिस्तीन के भीतर ही उनकी अपनी अलग सल्तनत बन गई और उन्होंने अम्मान पर नियंत्रण कर लिया और सुल्तान हुसैन के शासन को नजरअंदाज किया. 

अमेरिका और ब्रिटेन एक तरह से जॉर्डन की सैन्य ताकत को फिर से धार देने में मदद कर रहे थे लेकिन सुल्तान हुसैन को एक ऐसे शख्स की जरूरत थी जो उनकी सेना में फिर से जान फूंक सके. ऐसे समय में इजरायल और फिलिस्तीन की इस जंग में ब्रिगेडियर जिया उल हक की एंट्री होती है. यह वह समय था जब फिलिस्तीनी सुल्तान हुसैन की सत्ता को चुनौती दे रहे थे और इराक और सीरिया आंतकियों की मदद में जी-जान लगा रहे थे.

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सुल्तान हुसैन को पाकिस्तान के सैन्य विशेषज्ञों की टीम का साथ मिला जिन्होंने उनकी सेना को दोबारा संगठित करने और युद्ध के लिए तैयार करने में मदद की. इन एक्सपर्ट्स में ब्रिगेडियर जिया उल हक भी थे.

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक शेख अजीज ने 2013 में कहा था कि जिया उल हक को 1967 में जॉर्डन भेजा गया था, जहां वह तीन साल रहे. उन्होंने जॉर्डन की सेना को ट्रेनिंग दी और Black September के नाम से ऑपरेशन की अगुवाई की थी. 

जब निशाने पर आए थे जॉर्डन के सुल्तान हुसैन

साल 1969 में जॉर्डन की स्थिति सुल्तान हुसैन के लिए काफी चुनौतिपूर्ण हो गई थी. बाथ पार्टी इराक और सीरिया पर कब्जा किए हुए थी. मई 1970 में इराक ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) के चेयरमैन यासेर अराफात को बताया कि वह सुल्तान हुसैन को उखाड़ फेंकने के लिए उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं. 

रिडेल ने 'फिफ्टी ईयर्स आफ्टर ब्लैक सितंबर इन जॉर्डन' में कहा है कि सुल्तान हुसैन अपने तेज तर्रार फैसलों, इंटेलिजेंस सर्विस और सेना की वफादारी की वजह से बड़ी से बड़ी चुनौतियों से जूझकर बाहर निकले थे. इसमें जिया उल हक की भी बड़ी भूमिका थी. इस दौरान किस्मत का भी अहम रोल था.

साल 1969 में जॉर्डन की स्थिति सुल्तान हुसैन के लिए काफी चुनौतिपूर्ण हो गई थी. बाथ पार्टी इराक और सीरिया पर कब्जा किए हुए थी. मई 1970 में इराक ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) के चेयरमैन यासेर अराफात को बताया कि वह सुल्तान हुसैन को उखाड़ फेंकने के लिए उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं. 

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जब सुल्तान हुसैन के लिए लड़े थे जिया उल हक

जैसे ही सीरिया के टैंक जॉर्डन पहुंचे. सुल्तान हुसैन ने पाकिस्तान के जिया उल हक को जमीनी आकलन के लिए मौके पर भेजा. इसी दौरान वह सीधे तौर पर युद्ध में शामिल हुआ और उसके हाथ फिलिस्तीनियों के खून से सन गए.

सीआईए अधिकारी जैक ओकॉनेल कहते हैं कि जिया ने बताया था कि स्थिति बहुत गंभीर थी. जॉर्डन अपनी सेना की मदद से सीरियाई टैंकों को रोक सकता था. जिया ने प्रभावी रूप से जॉर्डन की तरफ से जवाबी हमले का प्रभार संभाला था. इसी का नतीजा है कि जिया उल हक को फिलिस्तीनी हत्यारा कहा जाता है. 

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