ड्रोन हमले के बाद तेल कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से शुरू की निकासी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच इराक के तेल क्षेत्रों में काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाने लगा है. कई अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों ने अपने विदेशी कर्मचारियों को इराक से निकालकर कुवैत भेजना शुरू कर दिया है. यह निकासी इराक-कुवैत सीमा पर स्थित सफवान बॉर्डर क्रॉसिंग के रास्ते की जा रही है.
कर्मचारियों को सफवान बॉर्डर के रास्ते भेजा जा रहा कुवैत
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हैलिबर्टन (Halliburton), केबीआर (KBR) और श्लंबरजे (Schlumberger) जैसी प्रमुख तेल सेवा कंपनियों ने अपने प्रवासी कर्मचारियों को बसों के जरिए इराक के तेल क्षेत्रों से निकालकर सीमा तक पहुंचाया. इसके बाद कर्मचारियों को कुवैत में प्रवेश कराने की प्रक्रिया शुरू की गई.
शनिवार को सामने आए वीडियो में देखा गया कि इराक के बसरा इलाके से बसों में सवार होकर विदेशी कर्मचारी सफवान सीमा चौकी पर पहुंचे. वहां सुरक्षा अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट की जांच की और उन्हें आगे कुवैत जाने की अनुमति दी. कई कर्मचारी पासपोर्ट नियंत्रण क्षेत्र में कतारों में खड़े दिखाई दिए.
तेल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक अधिकारी मोहम्मद तामेह ने बताया कि इराक की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से कुवैत भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा, “इराक में सुरक्षा हालात को देखते हुए तेल स्टेशनों पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारी कुवैत के लिए रवाना हो गए हैं. वहां से आगे वो तय करेंगे कि उन्हें कहां जाना है.'
ड्रोन हमले के बाद तेल कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से शुरू की निकासी
दरअसल, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. पिछले दिनों ईरान की ओर से किए गए हमलों के बाद इराक में भी सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं.
शुक्रवार को इराक के बसरा क्षेत्र में एक ड्रोन हमले की घटना सामने आई थी. सुरक्षा सूत्रों के अनुसार इस हमले में विदेशी तेल कंपनियों के कर्मचारियों के रहने वाले परिसर को निशाना बनाया गया था. हमले के बाद अमेरिकी कंपनियों हैलिबर्टन और केबीआर के कार्यालयों और गोदामों में आग लग गई थी.
हालांकि इस घटना में किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके बाद तेल कंपनियों ने एहतियात के तौर पर अपने विदेशी कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का फैसला किया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है. फिलहाल कंपनियां अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.