अमेरिकी सैन्य अभियान के तीसरे दिन, 1 मार्च को तेहरान का खातम-अल-अंबिया अस्पताल भीषण बमबारी की चपेट में आ गया. इस वक्त आसमान से बम बरस रहे थे और अस्पताल की छतें व दीवारें ढहने लगी थीं, तब नवजात शिशु वार्ड में अफरा-तफरी मच गई. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे, लेकिन वहां तैनात नर्स नेदा सलीमी ने भागने के बजाय बच्चों को बचाने का फैसला किया.
ईरानी न्यूज एजेंसी 'Wana' के मुताबिक, जिन तीन बच्चों को नेदा ने अपनी गोद में समेटा, उन्हें दुनिया में आए अभी एक घंटा भी नहीं गुजरा था. उनकी माएं उस वक्त आईसीयू में थीं और खुद हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं थीं. मलबे, धूल और धुएं से भरे गलियारों के बीच नेदा ने तीनों बच्चों को अपने सीने से सटाया और मौत के मुंह से बाहर निकाल लाईं. इस जांबाज नर्स की बहादुरी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग चीखने-चिल्लाने लगे, दीवारें और छतें पहले ही गिरने लगी थीं. हवा में भी चारों ओर गाढ़ी धूल भर गई थी, लेकिन सबसे पहले खुद के लिए पनाह ढूंढने के बजाय, नर्स नेदा, बच्चों के पालनों की ओर दौड़ी और एक-एक करके बच्चों को बाहर निकाला.
बच्चों को मां से मिलाई...
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्स नेदा धुएं और मलबे से भरे गलियारों से होते हुए, तीन नवजात शिशुओं को अपनी छाती से लगाए हुए बाहर निकलने में कामयाब रहीं. बाद में इन बच्चों को उनकी माताओं को सौंप दिया गया.
अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें उसने ईरान पर बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. इन हमलों ने तेहरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया, जिसमें उस समय के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. इसके साथ ही देश भर में कई अहम नागरिक और रक्षा बुनियादी ढांचे को भी नष्ट कर दिया.
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ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस संघर्ष में मरने वालों की अंतिम तादाद जंग की शुरुआत से लेकर सीजफायर की तारीख 8 अप्रैल तक 3,375 रही. इस संख्या में मेडिकल से जुड़े 26 सदस्य भी शामिल थे, जबकि युद्ध के दौरान उनमें से 118 लोग घायल हुए थे.