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'हमने अपने सर्वोच्च लीडर को खो दिया', ईरानी सेना ने की खामेनेई की मौत की पुष्टि

ईरानी मीडिया 'प्रेस टीवी' ने पुष्टि की है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए हैं. उनके साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं. इस खबर ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंका को चरम पर पहुंचा दिया है.

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ईरानी मीडिया ने पुष्टि की है कि एयरस्ट्राइक में खामेनेई की मौत हो गई है (Photo: AFP)
ईरानी मीडिया ने पुष्टि की है कि एयरस्ट्राइक में खामेनेई की मौत हो गई है (Photo: AFP)

ट्रंप और इजरायल के दावे के बाद अब ईरान की सेना(IRGC), सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA और मुख्य समाचार चैनल 'प्रेस टीवी' (Press TV) ने आधिकारिक तौर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है. शनिवार को जिस समय यह हमला किया गया उस समय खामेनेई अपने दफ्तर में मौजूद थे.

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने बयान में इमाम खामेनेई की शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है. संगठन ने उनकी मौत को “सम्मानित शहादत” बताते हुए कहा कि उनका रास्ता जारी रहेगा. बयान में अमेरिका और “ज़ायोनी शासन” को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी कार्रवाई और बदले की चेतावनी दी गई है. साथ ही, जनता से राष्ट्रीय एकता और मजबूती दिखाने की अपील की गई है.

इससे पहले प्रेस टीवी ने लिखा, 'इस्लामिक क्रांति के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए हैं.' खामेनेई की मौत के बाद ईरान में एक हफ्ते के सार्वजनिक अवकाश और 40 दिन के सार्वजनिक शोक की घोषणा की गई है.

S-Israel Iran Strike LIVE: खामेनेई की मौत की खबरों के बीच ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक, सुप्रीम लीडर के पोस्टर के साथ सड़कों पर उतरे लोग

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कौन थे खामेनेई

86 साले के अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यकाल में ही ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया और अमेरिका-इजरायल से टकराव बढ़ा. उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क को मजबूत किया, लेकिन आर्थिक संकट और दमन के कारण देश में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. 2022 के महसा अमीनी आंदोलन सहित कई आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया. 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद खामेनेई ने सत्ता संभाली और इस्लामी गणराज्य को नई दिशा दी. उन्होंने शिया धर्मगुरुओं और रिवोल्यूशनरी गार्ड की ताकत बढ़ाई, जो बाद में सैन्य और आर्थिक रूप से बेहद प्रभावशाली संस्था बन गई.

उनके शासन में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाया, जिससे अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव बढ़ा. 2015 के परमाणु समझौते के बावजूद, बाद में अमेरिका के हटने से तनाव और बढ़ गया. ईरान ने उच्च स्तर तक यूरेनियम संवर्धन जारी रखा. क्षेत्रीय स्तर पर, खामेनेई ने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ के जरिए हिज्बुल्लाह, हमास और अन्य गुटों का समर्थन किया. हालांकि 2023 के बाद मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ा और ईरान के कई सहयोगी कमजोर पड़े.

उनकी मौत के बाद इस्लामी गणराज्य के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं. 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी सामने नहीं है. आगे की दिशा में रिवोल्यूशनरी गार्ड की भूमिका अहम मानी जा रही है.

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यह भी पढ़ें: इजरायल-अमेरिकी हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद और पोते की भी मौत: ईरानी मीडिया

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा था, "इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक" अब नहीं रहा. उन्होंने इसे ईरान के लोगों के लिए स्वतंत्रता का एक बड़ा अवसर बताया था. 

वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिए थे कि खामेनेई का पूरा ठिकाना जमींदोज कर दिया गया है. इजरायली खुफिया सूत्रों का दावा है कि यह एक "सर्जिकल स्ट्राइक" थी जिसे अत्याधुनिक हथियारों और सटीक जानकारी के आधार पर अंजाम दिया गया.


 प्रेस टीवी की पुष्टि के बाद अब ईरान में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. तेहरान की सड़कों पर सन्नाटा और दहशत का माहौल है, जबकि सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. ईरान के विदेश मंत्रालय और सैन्य कमांडरों ने इस "कायराना हमले" का बदला लेने की बात कही है, जिससे पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध या तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं गहरा गई हैं.

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