खाड़ी देशों (Gulf) में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को बहुत ही सख्त और सीधी चेतावनी दी है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ने भी उसकी सरजमीं पर पैर रखने की हिमाकत की, तो उसे इसका बहुत बुरा पछतावा होगा. आजतक को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान से सीधी बात की. उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह के तनाव, यहां तक कि जमीनी हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
बघाई का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं. उन्होंने वॉशिंगटन पर आरोप लगाया कि वह परमाणु बातचीत के बहाने ईरान को पूरी तरह घुटने टेकने के लिए मजबूर करना चाहता है. इस पर बघाई ने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका अपनी मर्जी थोपना चाहता है, तो उसे बातचीत नहीं कहा जा सकता.
इंटरव्यू के दौरान इस्माइल बघाई ने अमेरिका को धोखेबाज करार दिया. उन्होंने कहा कि ईरान अब अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं करता. उनके मुताबिक, पिछले 9 महीनों के भीतर अमेरिका ने दो बार बातचीत की मेज को खुद ही तोड़ दिया है. जब एक पक्ष बातचीत में 100% अपनी ही शर्तें मनवाना चाहता है, तो सामने वाले के पास समझौते की गुंजाइश नहीं बचती. यही वजह है कि ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के हालिया परमाणु प्रस्ताव को भी सिरे से खारिज कर दिया है.
बघाई ने साफ किया कि ईरान ने अपनी तरफ से जो प्रस्ताव दिया है, उसमें सबसे पहली प्राथमिकता क्षेत्र में जारी दुश्मनी को खत्म करना है. ईरान चाहता है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा सभी के लिए खोला जाए, लेकिन उससे पहले अमेरिका को अपनी समुद्री घेराबंदी हटानी होगी. उन्होंने याद दिलाया कि 28 फरवरी से पहले यह रास्ता पूरी दुनिया के लिए खुला था, लेकिन अमेरिका की हरकतों की वजह से ईरान को कड़े कदम उठाने पड़े.
भारत को लेकर ईरान की चिंता और इजरायल पर हमला
बघाई ने इस बात को स्वीकार किया कि खाड़ी में जारी तनाव से भारत जैसे देशों पर बुरा असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा, 'हमें बिल्कुल खुशी नहीं है कि भारत और अन्य देशों को इन हालातों का सामना करना पड़ रहा है. हम खुद एक तटीय देश हैं और हॉर्मुज के रास्ते पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं. हम भी चाहते हैं कि यह रास्ता सुरक्षित रहे.' उन्होंने इस पूरे संकट के लिए अमेरिका और इजरायल की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया.
इजरायल के परमाणु रुख पर हमला बोलते हुए बघाई ने इसे एक 'ब्लैक कॉमेडी' बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश के पास खुद परमाणु हथियार हैं, वह ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर सवाल कैसे उठा सकता है? उनके अनुसार, मिडिल ईस्ट को परमाणु मुक्त बनाने की राह में इजरायल ही सबसे बड़ा रोड़ा है.
'ईरान के पास अभी कई सरप्राइज बाकी हैं'
ट्रंप के उन दावों को बघाई ने पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हो गई है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका अभी भी ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगा रहा है. बघाई ने बताया कि 'ईरान के पास कई ऐसी क्षमताएं और सरप्राइज हैं, जिनका इस्तेमाल हम वक्त आने पर करेंगे.' उन्होंने दावा किया कि आज के दौर में अमेरिका पूरी दुनिया में अकेला पड़ता जा रहा है, यहां तक कि उसके अपने ब्रिक्स पार्टनर और खुद अमेरिकी संसद के सदस्य इस युद्ध पर सवाल उठा रहे हैं.
अंत में बघाई ने पुष्टि की कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जल्द ही ब्रिक्स बैठक के लिए भारत आने वाले हैं. इस दौरान भारत और ईरान के बीच बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और समुद्री व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चर्चा हो सकती है. भारत के लिए यह दौरा बहुत अहम है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें और व्यापार इसी समुद्री रास्ते से जुड़े हैं.