ईरान में जंग की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद अमेरिका एक्शन मोड में नजर आ रहा है. अमेरिकी जहाजी बेड़े में हलचल है और इसी बीच ईरान ने भी अलर्ट बटन दबा दिया है. ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर लिया है, जिससे हालात की गंभीरता और बढ़ गई है.
ईरान पर ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, यह कहना खुद ट्रंप के लिए भी आसान नहीं है. उनके कुछ सलाहकार ईरान पर अब तक का सबसे घातक हमला करने की सलाह दे रहे हैं, जबकि कुछ बड़ी जंग में उलझने से बचने की नसीहत दे रहे हैं. यही वजह है कि ट्रंप के बयान सुबह और शाम बदलते रहे हैं.
हाल ही में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में अब हत्याएं बंद हो गई हैं और प्रदर्शनकारियों को दी जाने वाली फांसी भी टाल दी गई है.
सड़कों पर हिंसा नहीं, लेकिन क्रैकडाउन जारी
ईरान की सड़कों पर भले अब हिंसक जनसैलाब नजर न आता हो, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में सुरक्षाबलों द्वारा प्रदर्शनकारियों को दौड़ाकर गोली मारते हुए देखा जा सकता है.
कुछ फुटेज में दुकानों के अंदर से भागते प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के दृश्य दिखाई देते हैं. वहीं एक अन्य वीडियो में सुनसान सड़क पर एक बच्चे को पकड़ने की कोशिश करते सुरक्षाकर्मी नजर आते हैं, जहां आरोप है कि बच्चे पर भी गोलियां चलाई गईं.
एक और वायरल वीडियो में अस्पताल के भीतर गोली चलने की आवाजें सुनाई देती हैं. दावा किया गया कि सुरक्षाकर्मी अस्पताल में घुसते ही भगदड़ मच गई.
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ईरान का दावा – प्रदर्शन नहीं, आतंकवाद से मुकाबला
इन तमाम हिंसक झड़पों के बीच ईरान का दावा है कि जिन लोगों पर गोलियां चलाई गईं, वे प्रदर्शनकारी नहीं बल्कि आतंकवादी थे. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के मुताबिक सुरक्षाबल आतंकवादी सेल्स से लड़ रहे थे, जिन्होंने पुलिसकर्मियों को पकड़कर जिंदा जलाया, सिर काटे और गोलियां चलाईं.
ईरान का आरोप है कि प्रदर्शन के बहाने विदेशी साजिश के तहत हथियारबंद हमलावर भेजे गए, जिनका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना था ताकि हालात बेकाबू हों और बाहरी दखल का रास्ता बने.
मौतों के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस हिंसा में ढाई हजार से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 12 हजार लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि ईरान सरकार ने मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है.
ईरान ने यह जरूर दावा किया है कि इस संघर्ष में 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. जब इन जवानों की अंतिम यात्रा निकली, तो तेहरान की सड़कों पर भारी भीड़ नजर आई. ताबूतों के साथ अमेरिका विरोधी नारे लिखे बैनर और पोस्टर दिखाई दिए. मातम और आक्रोश का माहौल पूरे देश में फैला रहा.
फांसी टालने का ऐलान और अमेरिका की प्रतिक्रिया
इसी बीच ईरान ने इरफान सुल्तानी को दी जाने वाली मौत की सजा टालने का ऐलान किया. विदेश मंत्री अराघची ने साफ कहा कि न आज, न कल और न ही भविष्य में किसी तरह की फांसी का कोई प्लान है.

ईरान के इस ऐलान को अमेरिका ने भी अच्छी खबर बताया. अमेरिका का दावा है कि उसके दबाव की वजह से ही ईरान ने हत्याएं रोकी हैं और फिलहाल ईरान पर कार्रवाई नहीं होगी.
फिर भी क्यों बढ़ रहा है हमले का खतरा
हालांकि अमेरिकी सैन्य तैयारियों को देखकर आशंका बनी हुई है कि हालात बदलते ही अमेरिका ईरान पर हमले की योजना बना सकता है. अमेरिकी समुद्री बेड़ा मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. ईरान ने एहतियातन कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया था.
कतर में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है. भारत ने भी अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह जारी कर दी है.
ट्रंप के बयान और पुरानी जंग की यादें
ईरान पर हमले की आशंका ट्रंप के बयानों से भी बढ़ती है, जिसमें उन्होंने ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की थी. इससे पहले जून 2025 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की यादें भी ताजा हैं, जब परमाणु ठिकानों पर भारी बमबारी का दावा किया गया था.
ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो वह भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार करेगा. विदेश मंत्री अराघची ने कहा है कि बैलिस्टिक मिसाइलें ईरान की सुरक्षा के लिए हैं और इस पर कोई समझौता नहीं होगा.
सत्ता परिवर्तन की आशंका और रेजा पहलवी फैक्टर
ईरान में आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बीच सत्ता परिवर्तन की चर्चा भी तेज हो गई है. प्रदर्शन लंबे खिंचने के बाद रेजा पहलवी का नाम सामने आया. उनके समर्थन में पुराने शाही झंडे लहराए गए और सोशल मीडिया पर उनके संदेश आने लगे.
रेजा पहलवी ने ईरान में बदलाव का रोडमैप पेश किया, जिसमें इस्लामिक रिपब्लिक की जगह धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ईरान की बात कही गई. उन्होंने परमाणु सैन्य कार्यक्रम खत्म करने, अमेरिका से रिश्ते सामान्य करने और इजरायल को मान्यता देने जैसे वादे किए.
अमेरिका का भरोसा डगमगाया
हालांकि ट्रंप के बयानों से साफ है कि उन्हें रेजा पहलावी की क्षमता पर पूरा भरोसा नहीं है. ईरान के अंदर भी शाही शासन के खुले समर्थक नजर नहीं आते.
ऐसे में अगर अमेरिका किसी बहाने से ईरान पर हमला करता है, तो आशंका जताई जा रही है कि सत्ता शाही शासन के बजाय रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स यानी सेना के हाथ में जा सकती है.