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मिलिट्री अटैक नहीं तो और क्या... खामेनेई के खिलाफ ट्रंप के तरकश में और कौन-कौन से तीर

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में 'दखल' के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

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खामेनेई सरकार के खिलाफ ट्रंप के पास क्या ऑप्शन (Photo: AP)
खामेनेई सरकार के खिलाफ ट्रंप के पास क्या ऑप्शन (Photo: AP)

ईरान में जो सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे, वो अब हिंसक होते जा रहे हैं. अब तक इन प्रदर्शनों में 500 लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है. ईरान में जारी इन प्रदर्शनों पर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी करीब से नजर बनाए हुए हैं. इस बीच दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ईरान में जानलेवा विरोध प्रदर्शनों के बाद कई संभावित मिलिट्री विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

बताया जा रहा है कि ट्रंप अब तक ईरान को जो धमकियां दे रहे थे, उस पर अमल करने पर सोच रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन को बताया कि हाल के दिनों में ट्रंप को ईरान में 'दखल' के अलग-अलग प्लान के बारे में जानकारी दी गई थी. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को पेश किए गए कई विकल्पों में ईरान की सिक्योरिटी सर्विसेस को निशाना बनाने पर फोकस किया गया है, जिनका इस्तेमाल विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए किया जा रहा है.

हालांकि, सरकार के अंदर इस बात को लेकर भी चिंता है कि मिलिट्री हमले बैकफायर कर सकते हैं और विरोध प्रदर्शनों को कमजोर कर सकते हैं. अधिकारियों को इस बात की चिंता है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरानी लोग वहां की समर्थन में एकजुट हो सकते हैं या फिर ईरान की सेना भी पलटवार कर सकती है.

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क्या-क्या कर सकते हैं ट्रंप?

सीएनएन ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ट्रंप ईरान के शासन को टारगेट करने के लिए कई और विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं, जिसमें मिलिट्री अटैक शामिल नहीं हैं. 

एक अधिकारी ने बताया कि इन विकल्पों में ईरानी सेना या खामेनेई शासन के ठिकानों पर साइबर ऑपरेशन शामिल हैं. इसके अलावा, इन विकल्पों में ईरान के एनर्जी या बैंकिंग जैसे सेक्टरों के खिलाफ नए प्रतिबंध भी शामिल हैं.

बताया ये भी जा रहा है कि ट्रंप सरकार ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए स्टारलिंक जैसी टेक्नोलॉजी देने पर भी विचार कर रही है, जिससे प्रदर्शनकारियों को ब्लैकआउट से बचने में मदद मिलेगी. 2022 में तत्कालीन बाइडेन सरकार ने भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसी तरह की कनेक्टिविटी देने की पेशकश की थी. तब ईरान में महसा अमीनी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.

हालांकि, अब तक ट्रंप ने कोई फैसला नहीं लिया है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में ट्रंप अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ मीटिंग करके आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं.

क्या वाकई कुछ करने वाले हैं ट्रंप?

ईरान में 28 दिसंबर से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. ट्रंप कई बार धमकी दे चुके हैं कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा जाता है, तो अमेरिका दखल देगा. हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि ईरान आजादी मांग रहा है और उनकी मदद के लिए अमेरिका तैयार है. इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है तो अमेरिका इसमें दखल देगा.

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अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप ने अभी तक दखल पर कोई फैसला नहीं लिया है लेकिन वह कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, क्योंकि ईरान में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. व्हाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी ने सीएनएन से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप जिन ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं, उनमें ईरान में जमीन पर सेना उतारने का विकल्प शामिल नहीं है.

ईरान ने भी दी धमकी

इन प्रदर्शनों को लेकर ईरान और अमेरिका एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं. ट्रंप की ओर से 'दखल' की धमकी दिए जाने के बाद ईरान भी आर-पार के मूड में है.

ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका मिलिट्री दखल देता है तो ईरान भी अमेरिकी मिलिट्री और कमर्शियल ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा. मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा, 'अगर अमेरिरा ईरान या उसके कब्जे इलाकों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है तो अमेरिकी मिलिट्री और शिपिंग सेंटर्स को टारगेट किया जाएगा.'

अब तक 500 मौतें, 10 हजार से ज्यादा गिरफ्तार

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में 500 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है. ईरान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समहूत के डिप्टी डायरेक्टर स्काईलर थॉम्पसन ने कहा कि पिछले 15 दिनों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 10,675 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 169 बच्चे भी शामिल हैं.

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वहीं, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेसी (HRANA) ने बताया कि इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 490 लोग मारे जा चुके हैं. इससे पहले ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा था कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हैं, उन्हें 'खुदा का दुश्मन' माना जाएगा और उन्हें मौत की सजा दी जाएगी.

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