ईरान का खामेनेई शासन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से बौखला गया है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी सलाहकार ने आरोप लगाया कि ईरान में चल रहे आंदोलन के पीछे अमेरिका का हाथ है. उन्होंने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर अमेरिका को अपने सैनिकों की सुरक्षा की परवाह है तो वो ईरान में दखल नहीं देगा.
ट्रंप ने शुक्रवार को ट्रूथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा, 'अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा. अगर प्रदर्शनकारियों को गोली मारी गई और उनकी हत्या की गई, तो अमेरिका पूरी तरह तैयार है.'
ट्रंप की इस धमकी पर पलटवार करते हुए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारिजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इजरायली अधिकारियों और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से यह साफ है कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा था. हम वास्तव में प्रदर्शन कर रहे लोगों और तोड़फोड़ करने वाले तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं. ट्रंप को यह समझना चाहिए कि इस घरेलू मामले में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगा.'
उन्होंने धमकी के अंदाज में आगे लिखा, 'अमेरिकी जनता को यह जानना चाहिए कि इस मुहिम की शुरुआत ट्रंप ने ही की है और उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए.'
ईरान में 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के बाद यह पहली बार है जब ईरानी इतने बड़े पैमाने पर सड़कों पर हैं. ये प्रदर्शन बिगड़ती आर्थिक स्थिति, महंगाई और ईरानी मुद्रा रियाल की भारी गिरावट के चलते शुरू हुए. ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कई प्रांतों में अशांति फैलने के दौरान कम से कम सात लोगों की मौत हुई है.
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान में एक पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद तीन लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हो गए. फार्स ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस हेडक्वार्टर में घुसकर सुरक्षा बलों से झड़प की और कई पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी.
ईरान में विरोध-प्रदर्शनों की शुरुआत रविवार को हुई जब दुकानदारों और व्यापारियों ने मुद्रा संकट और बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. तेहरान समेत कई बड़े शहरों और लोरेस्तान, फार्स, केरमानशाह, खुजेस्तान और हमेदान जैसे प्रांतों में भी विरोध की खबरें आईं.
ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फर्जिन ने इस्तीफा दे दिया है.