अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाया गया, तो इसे पूरे ईरानी राष्ट्र के खिलाफ युद्ध माना जाएगा. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि किसी भी "अन्यायपूर्ण आक्रमण" का जवाब "कठोर" होगा. इस बीच सरकारी चैनल को हैक कर उसपर प्रदर्शनों की वीडियो चलाए जाने का मामला भी सामने आया है.
पेजेश्कियन की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद आई है. ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि "ईरान में नए नेतृत्व की जरूरत है." उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या या फांसी जारी रही तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है.
यह भी पढ़ें: ईरान में विरोध प्रदर्शनों का खौफनाक आंकड़ा, 5,000 से ज्यादा मौतें, 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर ईरान की आर्थिक बदहाली का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और "अमानवीय प्रतिबंधों" की वजह से आम ईरानी नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं ईरानी शासन ने यह भी कुबूल किया कि प्रदर्शनों में कमोबेश 5000 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं.
ईरान में सरकारी टीवी चैनल हैक
ईरान के बद्र सैटेलाइट को हैक करने का मामला भी सामने आया है और सरकारी चैनल पर प्रदर्शनों के वीडियोज चलाए गए हैं. इस दौरान राज्य टीवी पर निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी का संदेश प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने ईरानियों से इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध करने की अपील की. सरकार विरोधी मीडिया आउटलेट्स के मुताबिक, यह प्रसारण कुछ समय तक कई चैनलों पर देखा गया. इस फुटेज को रेजा पहलवी के मीडिया विभाग ने भी साझा किया है.
ट्रंप ने कहा ईरान ने 800 प्रदर्शनकारियों की फांसी रोकी
हालांकि कड़े बयानों के बीच एक दिन पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान ने 800 प्रदर्शनकारियों की प्रस्तावित फांसी रोक दी है. इसके बावजूद अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधन बढ़ा दिए हैं, हालांकि वॉशिंगटन ने अभी किसी ठोस कार्रवाई का खुलासा नहीं किया है.
इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने ट्रंप को "अपराधी" करार देते हुए स्वीकार किया कि अशांति के दौरान "हजारों लोगों की मौत" हुई है. उन्होंने हिंसा के लिए अमेरिका और इजरायल समर्थित "आतंकी और दंगाइयों" को जिम्मेदार ठहराया.
यह भी पढ़ें: क्या सच में प्रदर्शनकारियों को 'सजा-ए-मौत' नहीं देगा ईरान... खामेनेई शासन की चाल में फंस गए ट्रंप!
28 दिसंबर से ईरान में चल रहा प्रदर्शन
पिछले महीने 28 दिसंबर तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन जल्द ही देशभर में फैल गए थे. शुरुआत आर्थिक मांगों से हुई, लेकिन बाद में ये खुले तौर पर इस्लामी शासन के खिलाफ नारेबाजी में बदल गए. सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और सड़कों पर भारी सुरक्षा बल तैनात किए.
ईरान की न्यायपालिका ने संकेत दिया है कि विरोध से जुड़े मामलों में फांसी की सजा फिर से दी जा सकती है. न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने कहा कि कुछ कृत्यों को "मोहारब" यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें मौत की सजा का प्रावधान है.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कुर्द बहुल इलाकों में हिंसा और मौतों की संख्या सबसे ज्यादा रही. हालात फिलहाल शांत जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन ईरान में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.