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क्या सच में प्रदर्शनकारियों को 'सजा-ए-मौत' नहीं देगा ईरान... खामेनेई शासन की चाल में फंस गए ट्रंप!

ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों को फांसी के आरोपों से इनकार कर रही है, लेकिन स्थानीय मीडिया का मानना है कि प्रदर्शनकारियों को कानूनी शब्दों में "आतंकी" या "उपद्रवी" घोषित किया जाता है. आरोप बदलते ही सजा भी बदल जाती है और कई मामलों में 'सजा-ए-मौत' का रास्ता खुल जाता है.

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ईरान में 28 दिसंबर को विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था. (Photo- AP)
ईरान में 28 दिसंबर को विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था. (Photo- AP)

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच ईरानी शासन के हालिया बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तरह की राहत का माहौल बनाया है, लेकिन स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के आकलन के मुताबिक यह राहत भ्रामक हो सकती है. ईरान के एक स्थानीय मीडिया संस्थान की मानें तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका बदला गया है, न कि सख्ती खत्म की गई है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में अमेरिकी न्यूज चैनल से कहा था कि तेहरान की प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की कोई योजना नहीं है. वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि उन्हें "पुख्ता सूत्रों" से जानकारी मिली है कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रोक दी गई हैं.

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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी यह दोहराया कि ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने एक दिन में होने वाली 800 फांसियों को रोक दिया. पहली नजर में अगर देखा जाए तो ईरानी शासन की तरफ से आया ये बयान बड़ी राहत देने वाली बात लगती है, लेकिन ईरानी पत्रकार पिछले रिकॉर्ड्स को देखकर बताते हैं कि ये तस्वीर कुछ और बयां करती है.

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खामेनेई शासन के समर्थन में प्रदर्शन की तस्वीर. (Photo- AP)

ईरान में प्रदर्शन के लिए मौत की सजा का प्रावधान नहीं

ईरान में प्रदर्शनों की वजह से मौत की सजा का प्रावधान नहीं है. मसलन, शासन की तरफ से उन प्रदर्शनों को अवैध जरूर कहा जाता है लेकिन उसके लिए किसी को फांसी नहीं दी जाती, बल्कि जेल की सजा दी जाती है. असल खेल शब्दों का है, प्रदर्शनों में विरोध की परिभाषाओं का है, जहां ईरानी प्रशासन प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग कैटगरी में रखते हैं.

खामनेनेई शासन के शब्दों का खेल?

मसलन, प्रदर्शन में शामिल होने के लिए एक प्रदर्शनकारियों को "शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी" और "उपद्रवी" की कैटगरी में रखा जा सकता है. ईरानी मीडिया की मानें तो बाद में इन्हीं लोगों को "तोड़फोड़ करने वालों", "देशद्रोही", "आतंकी" या "विदेशी ताकतों के एजेंट्स" के रूप में कैटगराइज किया जाता है - फिर शुरू होता है असली खेल.

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अब जब एक प्रदर्शनकारी को "प्रदर्शनकारी" की कैटगरी से हटाकर अपराधी की कैटगरी में शामिल किया जाता है तब उनपर गंभीर धाराएं लगाई जाती हैं, या कई बार मौत की सजा के प्रावधान वाली धाराएं लगाई जाती हैं. इनमें आतंकवाद या दुश्मन देश से सांठगांठ के आरोप शामिल होते हैं और इन मामलों में मौत की सजा का प्रावधान है.

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खामेनेई शासन के समर्थकों ने ट्रंप की फोटो जलाई. (Photo- AP)

स्थानीय मीडिया संस्थान ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट की मानें तो आरोप वही रहते हैं, लेकिन उनका कानूनी नाम बदल दिया जाता है. इसी वजह से सरकार यह कह सकती है कि वह "प्रदर्शनकारियों" को फांसी नहीं देती, जबकि हकीकत में विरोध से जुड़े लोगों को दूसरे नामों से उसी सजा का सामना करना पड़ता है.

संगठन या राजनीतिक दल को प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलती

ईरान सरकार बार-बार कहती है कि वह शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार मानती है, लेकिन दशकों से किसी स्वतंत्र संगठन या राजनीतिक दल को खुले प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई. सिर्फ सरकार समर्थित रैलियों को ही इजाजत मिलती है. हालिया प्रदर्शनों में भी देखा गया किस तरह विरोध प्रदर्शनों के बीच शासन समर्थक प्रदर्शनकारी किस तरह सड़कों पर उतर आए.

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स्थानीय पत्रकार कहते हैं कि असली खतरा यह नहीं है कि ईरान प्रदर्शन करने पर सीधे फांसी देगा, बल्कि यह है कि प्रदर्शन करने वालों की पहचान बदलकर उन्हें ऐसे अपराधों में फंसाया जाएगा, जिनकी सजा मौत है.

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