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ईरान का वो 'ट्रंप कार्ड', जिससे तेल की कीमतों में लग जाएगी आग... भारत पर भी होगा असर

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. अमेरिकी धमकियों के बीच इसे ईरान का ट्रंप कार्ड माना जा रहा है. अगर ईरान ने इस समुद्री रास्ते को निशाना बनाया तो इसका सीधा असर दुनियाभर की तेल कीमतों पर पड़ेगा.

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ईरान सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रहा है. (File Photo- Reuters)
ईरान सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रहा है. (File Photo- Reuters)

ईरान में भड़के भीषण सरकार विरोधी प्रदर्शनों और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच दुनिया पर एक बार फिर बड़े ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है. सामरिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बाधित किया, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.

दरअसल, ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' होने के नाते, यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा और भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का व्यापार होता है.

दुनिया की जीवनरेखा है यह संकरा समुद्री रास्ता

सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के लिए ईरान अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ईरान बदले की कार्रवाई के तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को निशाना बना सकता है. इसके लिए वह समुद्री माइंस बिछाकर, मिसाइलों और ड्रोन हमलों के जरिए या फिर जहाजों को परेशान करने की रणनीति अपनाकर इस रास्ते को बाधित कर सकता है. 

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अगर इस जलमार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान आता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच जाएगा, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

strait of hormuz

बता दें कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान हजारों लोगों के मारे जाने, इंटरनेट बंदी और सभी प्रांतों में फैली अशांति की खबरों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ईरानी शासन की कार्रवाई को लेकर कड़ी सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी है. इस आक्रामक बयानबाजी के बाद यह डर और गहरा गया है कि ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश कर सकता है. 

गौरतलब है कि जून में पिछले साल इजरायल-अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों के बाद भी तेहरान ने ऐसी धमकी दी थी. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी नौसेना की ताकत को देखते हुए ईरान लंबे समय तक इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं कर पाएगा, लेकिन थोड़े समय के लिए भी रुकावट तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है, जिससे वैश्विक महंगाई और बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है. यह ईरान के उत्तर में और ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दक्षिण में स्थित है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. खाड़ी देशों से तेल और गैस को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का यह एकमात्र समुद्री रास्ता है.

सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई सिर्फ करीब 33 किलोमीटर है और जहाजों के लिए निर्धारित लेनें तो कुछ किलोमीटर ही चौड़ी हैं. इसके बावजूद, दुनिया की रोजाना खपत होने वाले तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है, साथ ही बड़ी मात्रा में LNG भी यहीं से जाती है. 2025 में करीब 1.3 करोड़ बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरा, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 31 प्रतिशत है.

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दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर, भारत की बढ़ेगी चिंता

सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत और UAE जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति के निर्यात के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं, खासकर एशियाई बाजारों के लिए. चीन, जापान, भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देश, जो इस रास्ते से जाने वाले लगभग 80 प्रतिशत तेल, कंडेनसेट और LNG का उपभोग करते हैं, उनके लिए हॉर्मुज की स्थिरता सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है.

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क्या ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है?

अमेरिका स्थित थिंक टैंक ‘अटलांटिक काउंसिल’ के लिए लिखते हुए डैनियल ई. माउंटन के मुताबिक, ईरान कम से कम इस जलमार्ग से होने वाली कमर्शियल शिपिंग को रोक सकता है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि ईरान के पास 5,000 से 6,000 नौसैनिक माइंस हैं, जिन्हें वह अपनी 25 पनडुब्बियों के जरिए तेजी से तैनात कर सकता है. सिर्फ माइंस बिछाने की धमकी भी कुछ ही दिनों में कमर्शियल ट्रैफिक को रोक सकती है.

इसके अलावा, ईरान के पास तटीय रक्षा के लिए एंटी-शिप मिसाइलों का मजबूत नेटवर्क है. इसमें खलीज-ए-फार्स बैलिस्टिक मिसाइल, हॉर्मुज-1 और हॉर्मुज-2 मिसाइलें और नूर क्रूज मिसाइलें शामिल हैं. ईरान के पास हजारों ड्रोन भी हैं, जिनमें घरेलू और रूसी डिजाइन वाले शाहिद (Shaheed) श्रेणी के ड्रोन शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल पहले हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजरानी बाधित करने के लिए किया जा चुका है.

हालांकि, माउंटन का मानना है कि जलडमरूमध्य को पूरी तरह और लंबे समय के लिए बंद करना ईरान के लिए बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि अमेरिकी नौसेना की ताकत कहीं ज्यादा है. 1988 में जब ईरान ने आखिरी बार इस इलाके में माइंस बिछाने की कोशिश की थी, तब अमेरिका ने ‘ऑपरेशन प्रेइंग मैन्टिस’ के जरिए ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया था.

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क्या ईरान वैश्विक तेल कीमतों में आग लगा सकता है?

फोर्ब्स के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत व्यापारिक तेल और एक-तिहाई तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की शिपमेंट गुजरती है, जिसमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा एशियाई देशों चीन, जापान, भारत और दक्षिण कोरिया को जाती है. अगर इस रास्ते को बंद करने की कोशिश होती है, तो इसका असर तुरंत और व्यापक होगा. CNBC के अनुसार, पूर्ण रूप से बंद होने की स्थिति में तेल की कीमतें प्रति बैरल 10 से 20 डॉलर तक बढ़ सकती हैं.

गोल्डमैन सैक्स के हवाले से फोर्ब्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर एक महीने के लिए तेल प्रवाह आधा भी हो गया, तो कीमतें करीब 30 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं. BBC ने भी चेताया है कि इससे शेयर बाजारों में उथल-पुथल मच सकती है और चीन व भारत जैसे देशों में महंगाई बढ़ सकती है.

सिटीग्रुप ने भी अनुमान लगाया है कि लंबे समय तक व्यवधान रहने पर तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच सकती हैं.

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