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'मेरे बयान को दुश्मन ने तोड़ा-मरोड़ा...', पड़ोसी देशों से माफी पर बोले ईरानी राष्ट्रपति

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि खाड़ी देशों को प्रभावित करने वाले हमलों पर उनकी हालिया टिप्पणियों को दुश्मन ने गलत तरीके से पेश किया, ताकि उसके पड़ोसी देशों के बीच दरार पैदा की जा सके. उन्होंने साफ किया कि ईरान अपने दुश्मनों की धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है.

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ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को दी कड़ी चुनौती (Photo: Reuters)
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को दी कड़ी चुनौती (Photo: Reuters)

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक बड़ा बयान दिया है. रविवार को उन्होंने साफ किया कि उनके हालिया बयानों को दुश्मन ने गलत तरीके से पेश किया है. राष्ट्रपति पेजेश्कियन का कहना है कि दुश्मन देश ऐसी चाल चल रहे हैं जिससे पूरी दुनिया को यह लगे कि ईरान का अपने पड़ोसियों के साथ झगड़ा चल रहा है, जबकि असलियत में ईरान भाईचारा चाहता है. 

सरकारी टेलीविजन पर बात करते हुए पेजेश्कियन ने कहा, 'हम बार-बार कह चुके हैं कि हम पड़ोसियों को अपना भाई मानते हैं और हमारे रिश्ते अच्छे होने चाहिए.  हालांकि, हमलों का जवाब देने के लिए हम मजबूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा किसी पड़ोसी देश के साथ कोई विवाद है या हम उनके लोगों को नाराज करना चाहते हैं.'

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माफी पर मचे बवाल के बीच ट्रंप को जवाब

दरअसल, कुछ दिनों पहले पेजेश्कियन ने उन खाड़ी देशों से माफी मांगी थी जो ईरानी हमलों से प्रभावित हुए थे. उन्होंने कहा था, 'मैं व्यक्तिगत रूप से उन देशों से माफी मांगता हूं जिन्हें हमारी वजह से नुकसान हुआ.' इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ईरान से 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' करने को कहा था. पेजेश्कियन ने इसे ट्रंप का एक सपना बताया.

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पेजेश्कियन ने यह भी जानकारी दी कि ईरान की अस्थायी नेतृत्व परिषद ने पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का फैसला लिया है, लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी गई है. शर्त यह है कि ईरान पर उन देशों की जमीन से कोई हमला नहीं होना चाहिए. हालांकि, इस फैसले पर ईरान के भीतर ही कट्टरपंथी गुटों ने सवाल उठाए, जिसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय को फिर से स्पष्ट करना पड़ा कि ईरानी सेना अमेरिकी ठिकानों पर होने वाले किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देती रहेगी.

ट्रंप का सख्त रुख

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन अब ईरान के साथ बातचीत करने के मूड में नहीं है. ट्रंप का मानना है कि अगर ईरान का नेतृत्व ढांचा गिर जाता है, तो बातचीत की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. ट्रंप ने हमलों का बचाव करते हुए एक बार फिर दावा किया कि तेहरान अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बन गया था और वह परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब था. हालांकि उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया.

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जंग का खौफनाक मंजर और ईरान की चेतावनी

पश्चिमी एशिया में छिड़ी यह जंग अब दूसरे हफ्ते में पहुंच गई है. इजरायल ने ईरान के कई इलाकों पर नए हवाई हमले किए हैं और तेहरान धमाकों से दहल उठा है. आंकड़ों के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं.

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पेजेश्कियन ने अंत में अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा, 'दुश्मन चाहता है कि हम और बाकी इस्लामी देश आपस में लड़ें. जो लोग गाजा में हजारों बेगुनाह लोगों और 168 बच्चों को मारने पर नहीं शर्माते, उनके खिलाफ खड़ा रहना हमारा हक है. हमारा देश धमकियों और अत्याचार के सामने झुकने वाला नहीं है. हमारी वीर जनता किसी भी धमकी के सामने पीछे नहीं हटेगी.'

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