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ईरान ने भारत से चाबहार पोर्ट में निवेश जारी रखने की अपील की, अमेरिकी प्रतिबंधों पर जताई चिंता

चाबहार पोर्ट को लेकर ईरान के विदेश मंत्री ने भारत से आग्रह किया है कि इस परियोजना को जारी रखें. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद यह परियोजना भारत, सेंट्रल एशिया और यूरोप के लिए बेहद अहम है.

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ईरान ने भारत से चाबहार परियोजना को जारी रखने की अपील की (Photo: ITG)
ईरान ने भारत से चाबहार परियोजना को जारी रखने की अपील की (Photo: ITG)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत से एक बड़ी अपील की है. उन्होंने कहा कि भारत चाबहार बंदरगाह में अपना निवेश जारी रखे और मध्य पूर्व में शांति के लिए बड़ी भूमिका निभाए. यह बात उन्होंने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कही.

अमेरिका ने ईरान पर कई तरह की आर्थिक पाबंदियां लगाई हुई हैं. लेकिन अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह के लिए भारत को एक खास छूट यानी 'सैंक्शन वेवर' दे रखी थी. यह छूट 26 अप्रैल 2026 को खत्म हो गई. इसके बाद से भारत असमंजस में है कि चाबहार में काम आगे बढ़ाएं या नहीं.

ईरान के विदेश मंत्री ने क्या कहा?

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के बीच सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है. उन्होंने कहा कि भारत ने इस बंदरगाह को बनाने में बहुत अहम भूमिका निभाई है और उन्हें खुशी है कि भारतीयों ने यह काम किया. 

लेकिन उन्होंने यह भी माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत का निवेश धीमा पड़ गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अपना काम यहां जारी रखेगा.

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चाबहार का आर्थिक महत्व क्या है?

ईरान के विदेश मंत्री अराघची अराघची ने कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक सुनहरा दरवाजा बन सकता है. इसके जरिए भारत मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुंच सकता है. इसी तरह यूरोप और मध्य एशिया के देश इसी रास्ते से हिंद महासागर तक आ सकते हैं. यह एक बड़ा व्यापारिक गलियारा बन सकता है.

भारत अभी क्या कर रहा है?

अमेरिकी छूट खत्म होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो अमेरिका और ईरान दोनों से बात कर रहा है. इसके अलावा एक 'प्लान बी' भी तैयार हो रहा है जिसमें भारत प्रतिबंध की अवधि के दौरान चाबहार में अपनी हिस्सेदारी किसी ईरानी स्थानीय संस्था को अस्थायी रूप से सौंप सकता है. इस साल के बजट में मोदी सरकार ने चाबहार के लिए कोई पैसा नहीं रखा था.

यह भी पढ़ें: भारत-ईरान की एक डील से क्यों परेशान अमेरिका-चीन-पाकिस्तान? जानिए चाबहार पोर्ट पर 6 बड़े सवालों के जवाब

भारत की कूटनीतिक भूमिका पर क्या कहा?

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने भारत की तारीफ की क्योंकि भारत ने ईरान-अमेरिका जंग में कोई पक्ष नहीं लिया. उन्होंने कहा कि भारत की अच्छी छवि है और वो फारस की खाड़ी के सभी देशों का दोस्त है. उन्होंने भारत से अपील की कि वो इस इलाके में शांति और स्थिरता लाने के लिए ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाए.

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सीजफायर और ट्रंप पर क्या कहा?

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने माना कि अमेरिका के साथ जो सीजफायर हुआ है वो 'कमजोर बुनियाद पर' खड़ा है. उन्होंने ट्रंप प्रशासन को मध्य पूर्व में शांति की राह में सबसे बड़ी रुकावट बताया. उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकता.

चाबहार बंदरगाह क्या है और यह भारत के लिए क्यों जरूरी है?

चाबहार ईरान में एक समुद्री बंदरगाह है. भारत के लिए यह इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इसके जरिए भारत पाकिस्तान को बायपास करके यानी उसके रास्ते से बचते हुए सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों तक पहुंच सकता है. 

यह भारत के लिए एक सामरिक रास्ता है जो चीन के प्रभाव को भी काउंटर करता है. 2024 में भारत ने इस बंदरगाह के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को चलाने के लिए ईरान के साथ 10 साल का करार किया था. अब तक भारत यहां करीब 1000 करोड़ रुपये यानी 120 मिलियन डॉलर लगा चुका है.

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