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मन को ही नहीं, तन को भी छुआ लेवी स्ट्रॉस ने

शायद स्पैलिंग भी नहीं जानते थे, पर मन को लिवाइस की जीन्स ही भाती थी. कोई सस्ती सी लोकल जीन्स पर भी अगर लिवाइस का ठप्पा लगा मिल जाए,  उसे पहन तो दोस्तों के बीच अपनी इज्जत बढ़ जाती थी.

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शायद स्पैलिंग भी नहीं जानते थे, पर मन को लिवाइस की जीन्स ही भाती थी. कोई सस्ती सी लोकल जीन्स पर भी अगर लिवाइस का ठप्पा लगा मिल जाए,  उसे पहन तो दोस्तों के बीच अपनी इज्जत बढ़ जाती थी. मानना पड़ेगा कि अपनी शान में इजाफा तो लिवाइस ने ही किया. आज लिवाइस जीन्स के आविष्कारक के जन्मदिन पर उनसे भी आपको रूबरू करवा देते हैं.

26 फरवरी 1829 को जन्मे जर्मन-अमेरिकन बिजनेसमैन लेवी स्ट्रॉस यहूदी वंश के थे. नीले रंग की जीन्स बनाने का सपना लिए लेवी ने कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को से 1853 में जीन्स से सबका परिचय करवाया. 18 साल की उम्र में लेवी स्ट्रॉस ने अपने भाइयों जोनास और लुइस के साथ मिलकर जे. स्ट्रॉस ब्रदर एंड कंपनी शुरू कर दी थी. लेवी स्ट्रॉस ने 1873 में डेनिम कपड़े में नई तरह की जीन्स बनाकर उसे भी पेटेंट करवाया. नतीजतन जर्मनी में उनकी शान में एक म्यूजियम भी बनाया गया.

उन्हीं के नाम पर लेवी स्ट्रॉस या लिवाइस की जीन्स ने दुनिया में एक पहचान हासिल की.

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