अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीय नागरिकों पर वीजा धोखाधड़ी और साजिश रचने के गंभीर आरोप लगे हैं और इन्हें एफबीआई ने गिरफ्तार किया है. अमेरिकी संघीय अभियोजकों के अनुसार, इन लोगों ने 'U-Visa' और ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए दुकानों में 'फर्जी डकैती' (Staged Robberies) की साजिश रची थी.
आरोपियों ने अमेरिका के विभिन्न राज्यों (मैसाचुसेट्स, केंटकी, ओहायो) में कन्वीनिएंस स्टोर और शराब की दुकानों पर फर्जी हथियारबंद डकैतियां करवाईं. इसका मकसद स्टोर पर मौजूद क्लर्कों को खुद को 'हिंसक अपराध का शिकार' (Crime Victim) दिखाने का मौका देना था.
अमेरिका के कानून के मुताबिक, 'U-Visa' उन लोगों को मिलता है जो किसी अपराध के शिकार हुए हों और जांच में पुलिस की मदद करें. यह वीजा आगे चलकर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता साफ कर देता है.
सीसीटीवी में कैद करवाते थे 'वारदात'
चार्जशीट के मुताबिक, डकैती के दौरान एक फर्जी 'लुटेरा' दुकान में घुसकर क्लर्क या मालिक को हथियार दिखाकर धमकाता और कैश रजिस्टर से पैसे लेकर फरार हो जाता था. यह पूरी 'वारदात' स्टोर के सीसीटीवी कैमरे में कैद की जाती थी.
लुटेरे के भागने के करीब 5-10 मिनट बाद पुलिस को फोन किया जाता था. इस पूरी सेटिंग के लिए 'पीड़ितों' ने मुख्य मास्टरमाइंड को पैसे दिए थे, जिसने बदले में स्टोर मालिकों को भी हिस्सा दिया था.
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गिरफ्तारी और सजा का प्रावधान
पकड़े गए आरोपियों में जितेंद्र कुमार पटेल (39), महेश कुमार पटेल (36), संजय कुमार पटेल (45), दीपिका बेन पटेल (40), रमेश भाई पटेल (52), अमिताभ बेन पटेल (43), रौनक कुमार पटेल (28), संगीता बेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40) शामिल हैं.
इनमें से कुछ को मैसाचुसेट्स, ओहायो और केंटकी से गिरफ्तार किया गया है. वीजा धोखाधड़ी की साजिश के लिए इन्हें 5 साल तक की जेल और 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक) के जुर्माने की सजा हो सकती है.