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ट्रंप नौ साल बाद करेंगे चीन का दौरा, तीन दिन की विजिट में जिनपिंग से होगी मुलाकात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल तक चीन दौरे पर जाकर शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि जिनपिंग साल के अंत तक व्हाइट हाउस आ सकते हैं.

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ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल तक तीन दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे. (File Photo: ITG)
ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल तक तीन दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे. (File Photo: ITG)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच तीन दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है. योजना से जुड़े लोगों के अनुसार इस कार्यक्रम में ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी शामिल है.

ट्रंप ने पहले कहा था कि वह इस साल के अंत में शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस यात्रा की मेजबानी करेंगे. इसे दोनों देशों के बीच कई वर्षों के व्यापारिक तनाव के बाद रिश्तों को स्थिर करने की नई कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. 

साल के अंत तक अमेरिका आ सकते हैं जिनपिंग

एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में, जो बुधवार को रिकॉर्ड किया गया था, ट्रंप ने पुष्टि की कि शी जिनपिंग साल के अंत तक व्हाइट हाउस आएंगे और दोनों देशों के संबंध बेहद अहम हैं. उसी दिन ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच व्यापार, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बातचीत भी हुई थी. इससे पहले ट्रंप ने 2017 में चीन का दौरा किया था. वहीं शी जिनपिंग आखिरी बार 2023 में अमेरिका आए थे.

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वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापारिक तनाव

व्यापार को लेकर वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं. एक साल पहले सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप ने टैरिफ आधारित नीति पर काफी जोर दिया और स्टील, ऑटोमोबाइल समेत कई क्षेत्रों पर टैरिफ लगाने के साथ व्यापक रणनीतिक कदम उठाए. हालांकि उनकी टैरिफ नीति को आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा.

ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा झटका

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. अदालत ने कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़े कानून का सहारा लेकर वैश्विक स्तर पर टैरिफ लागू किए, जो उनके संवैधानिक अधिकारों के दायरे से बाहर है. 

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली 6-3 की बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए माना कि ट्रंप ने बड़े पैमाने पर आयात कर लगाने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता और इस तरह ट्रंप की कार्रवाई वैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है.

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