कनाडा में उस समय सियासी हलचल तेज हो गई जब ईरान के फुटबॉल संघ के अध्यक्ष मेहदी ताज को देश में प्रवेश के लिए जरूरी दस्तावेज जारी किए जाने का मामला सामने आया. ताज का नाम इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े होने के कारण पहले ही विवादों में रहा है, और यही वजह है कि इस फैसले ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया.
मामला तब और गंभीर हो गया जब यह खुलासा हुआ कि ताज और उनका प्रतिनिधिमंडल वैंकूवर में होने वाली फीफा कांग्रेस में हिस्सा लेने के लिए कनाडा आ रहे थे. हालांकि, उड़ान के दौरान ही उनके दस्तावेज रद्द कर दिए गए और टोरंटो पहुंचने पर उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई. बाद में उन्हें वापस भेज दिया गया लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि जब कनाडा पहले ही IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है, तो फिर ऐसे व्यक्ति को यात्रा की अनुमति दी कैसे गई.
इमिग्रेशन मंत्री लीना डायब ने संसद की समिति के सामने पेश होते हुए कहा कि वह इस घटना के लिए पूरी तरह जवाबदेह हैं, लेकिन इस फैसले की प्रक्रिया में उनकी सीधी भागीदारी नहीं थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति के पास कनाडा आने का कोई वैध दर्जा नहीं था और जैसे ही स्थिति स्पष्ट हुई, उसकी अनुमति रद्द कर दी गई. डायब ने यह भी भरोसा दिलाया कि इस मामले की पूरी जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो, खासकर तब जब देश 2026 के बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की तैयारी कर रहा है.
सरकार की ओर से सफाई जरूर दी गई, लेकिन विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है. कंजर्वेटिव नेता मिशेल रेम्पेल गार्नर ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है. उनके मुताबिक, किसी भी हालत में एक ऐसे व्यक्ति को परमिट नहीं दिया जाना चाहिए था, जिसका नाम एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा रहा हो. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं कनाडा की इमिग्रेशन प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर कर रही हैं.
इस बीच, इमिग्रेशन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी टेड गैलिवन ने भी माना कि यह घटना सिस्टम की खामी को दिखाती है और इसे दोबारा नहीं होने दिया जाएगा. वहीं प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सीधे तौर पर इस मामले के विवरण पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि कनाडा की इमिग्रेशन प्रक्रिया में कई स्तर की जांच होती है और वे प्रभावी हैं.
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब 2026 का फीफा वर्ल्ड कप 2026 नजदीक है और कनाडा इसकी सह-मेजबानी करने जा रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की एंट्री और सुरक्षा जांच को लेकर सरकार पर दबाव और बढ़ गया है.