scorecardresearch
 

कनाडा: खतरनाक एक्सीडेंट में 16 लोगों की जान लेने वाले भारतीय ट्रक ड्राइवर का डिपोर्टेशन टला, जानें पूरा मामला

यह मामला 6 अप्रैल 2018 की भयावह सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें 16 खिलाड़ियों और स्टाफ सदस्यों की मौत हो गई थी. यह हादसा कनाडा के सबसे दर्दनाक सड़क हादसों में से एक माना जाता है.

Advertisement
X
27 अप्रैल को जसकिरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट किया जाना था.
27 अप्रैल को जसकिरत सिंह सिद्धू को डिपोर्ट किया जाना था.

कनाडा में 2018 में हुई भीषण हम्बोल्ट ब्रोंकोस बस दुर्घटना के दोषी भारतीय मूल के ट्रक चालक जसकिरत सिंह सिद्धू के डिपोर्टेशन पर संघीय अदालत ने अस्थायी रोक लगा दी है. अदालत के इस फैसले के बाद सिद्धू फिलहाल कनाडा में ही रहेंगे और उन्हें तत्काल भारत नहीं भेजा जाएगा.

यह मामला 6 अप्रैल 2018 की उस दर्दनाक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जब सस्केचेवान की जूनियर हॉकी टीम Humboldt Broncos की बस एक सेमी-ट्रक से जोरदार टक्कर में शामिल हो गई थी. जांच में सामने आया कि ट्रक चालक जसकिरत सिंह सिद्धू एक स्टॉप साइन को पार करते हुए बस के रास्ते में आ गया था, जिसके कारण यह भीषण हादसा हुआ. इस दुर्घटना में 16 लोगों की मौत हो गई थी और अन्य 13 गंभीर रूप से घायल हुए थे. यह हादसा कनाडा के सबसे दर्दनाक सड़क हादसों में से एक माना जाता है.

अब शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान संघीय अदालत की न्यायाधीश ने सिद्धू की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की. सिद्धू के वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया कि उनके मानवीय और करुणा आधारित आवेदन पर निर्णय आने तक उन्हें देश से बाहर न भेजा जाए. अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए अस्थायी रोक लगा दी. इसका मतलब है कि जब तक सिद्धू के आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक उनका डिपोर्टेशन नहीं किया जाएगा.

Advertisement

जनवरी 2019 में 8 साल की जेल की सजा सुनाई गई

बता दें कि सिद्धू ने जनवरी 2019 में 29 मामलों में अपना अपराध स्वीकार किया था, जिनमें खतरनाक ड्राइविंग से मौत और गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप शामिल थे. मार्च 2019 में उन्हें 8 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. बाद में 2023 में उन्हें पैरोल पर रिहा किया गया. इसके बाद कनाडा की इमिग्रेशन और रिफ्यूजी बोर्ड ने उनकी स्थायी निवास स्थिति (PR) रद्द कर दी और उन्हें देश से निर्वासित करने का आदेश दिया था.

सिद्धू के वकीलों का कहना है कि उनका डिपोर्टेशन उनके परिवार के लिए गंभीर मुश्किलें पैदा करेगा. बताया गया है कि उनके छोटे बच्चे हैं, जिनमें से एक को जन्म से ही फेफड़ों की दुर्लभ बीमारी है. वकीलों का तर्क है कि भारत में खराब वायु गुणवत्ता उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है. इसके अलावा, कानूनी टीम ने यह भी दावा किया कि सिद्धू मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और भारत भेजे जाने पर उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है. यहां तक कि आत्महत्या के जोखिम की भी आशंका जताई गई.

सरकार का पक्ष

कनाडा सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि यह एक बेहद गंभीर आपराधिक मामला है, जिसमें 16 निर्दोष लोगों की जान गई थी. सरकार का कहना था कि इमिग्रेशन कानून के तहत ऐसे मामलों में देश से निष्कासन उचित कदम है. सरकारी वकीलों ने यह भी दलील दी कि मानवीय आधार पर आवेदन की प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन कानून केवल सीमित समय के लिए ही डिपोर्टेशन पर रोक की अनुमति देता है.

Advertisement

आगे क्या होगा?

अदालत ने फिलहाल सिद्धू को राहत देते हुए निर्वासन रोक दिया है, लेकिन यह रोक अस्थायी है. अब मामले की अगली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि सिद्धू को मानवीय आधार पर कनाडा में रहने की अनुमति मिलेगी या उन्हें भारत वापस भेजा जाएगा.

शुक्रवार के फैसले के बाद ये मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और अब सभी की नजरें आने वाले अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो इस संवेदनशील और लंबे चले आ रहे कानूनी विवाद की दिशा तय करेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement