अमेरिका और ब्रिटेन के बीच बढ़ती कड़वाहट के बावजूद ब्रिटिश किंग चार्ल्स का चार दिन का अमेरिका दौरा तय समय पर होने जा रहा है. यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि ब्रिटिश पीएम स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बीते दिनों में तू-तू-मैं-मैं देखा गया है.
ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा समीक्षा और अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के बाद यह दौरा रद्द नहीं किया जाएगा. किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला सोमवार को अमेरिका पहुंचेंगे. हालांकि डिनर के दौरान हुई फायरिंग के बाद कुछ समय के लिए इस यात्रा को लेकर अनिश्चितता जरूर बनी थी.
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इस घटना में एक हमलावर ने सुरक्षा कर्मियों के पास गोलीबारी की थी, जिसके बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था. इस घटना के बावजूद ट्रंप ने खुद कहा कि किंग चार्ल्स का दौरा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और व्हाइट हाउस परिसर बेहद सुरक्षित है. इस दौरे की अहमियत सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है.
अमेरिका-ब्रिटेन में बढ़ा तनाव
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है. सबसे बड़ा मतभेद ईरान को लेकर सामने आया, जब ब्रिटेन ने अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया था. इस पर ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की खुलकर आलोचना की थी और यहां तक कह दिया था कि अब रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे.
अमेरिका-ब्रिटेन में आर्थिक मोर्चा पर तनाव
इसके अलावा व्यापार को लेकर भी दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ा है. ट्रंप प्रशासन ने ब्रिटिश सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिससे आर्थिक रिश्तों में भी खटास आई. वहीं ग्रीनलैंड को लेकर विवाद ने भी दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ाई. जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने की बात दोबारा उठाई, तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने डेनमार्क का समर्थन किया, जिससे मामला और बिगड़ गया.
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अहम द्वीपों को लेकर भी अमेरिका-ब्रिटेन में मतभेद
चागोस द्वीप समूह और डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को लेकर भी अमेरिका ने ब्रिटेन की नीतियों पर सवाल उठाए हैं. इसके अलावा अमेरिकी सरकार द्वारा कुछ ब्रिटिश नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाने का मुद्दा भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का कारण बना. ऐसे हालात में किंग चार्ल्स का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है. यह सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों को संभालने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.