बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद कड़वाहट आ गई है. लेकिन, आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को मिली जीत के बाद एक बार फिर से दोनों देशों के बीच संबंध कैसे होंगे इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं.
इसी पर बात करने के लिए इंडिया टुडे से बातचीत में शामिल हुए बीएनपी के संयुक्त महासचिव (अंतरराष्ट्रीय संबंध) हुमायूं कबीर, जो नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारीक रहमान के करीबी सहयोगी माने जाते हैं. पेश है पूरी बातचीत प्रश्न–उत्तर फॉर्मेट में.
सवाल: बीएनपी की ऐतिहासिक जीत के बाद भारत के साथ रिश्तों को आप किस तरह देखते हैं, खासकर पिछले डेढ़ साल में दोनों देशों के बीच तनाव को ध्यान में रखते हुए?
जवाब: बांग्लादेश की जनता ने दो-तिहाई बहुमत देकर तारीक रहमान के नेतृत्व पर भरोसा जताया है. यह स्पष्ट जनादेश है. लेकिन भारत को यह समझना होगा कि आज का बांग्लादेश पहले जैसा नहीं है. शेख हसीना और अवामी लीग अब सत्ता में नहीं हैं. इसलिए भारत को अपने रिश्तों में एक ‘रीसेट’ करना होगा. अगर भारत यह समझते हुए आगे बढ़ता है, तो हम भी सकारात्मक सोच के साथ संबंध सुधारने को तैयार हैं.
सवाल: आपने ‘रीसेट’ की बात की. क्या इसका सीधा संबंध शेख हसीना की नई दिल्ली में मौजूदगी से है?
जवाब: हम यह नहीं चाहते कि भारत की जमीन से कोई ऐसी गतिविधि हो जो बांग्लादेश को अस्थिर करे. अगर शेख हसीना भारत में रहकर ऐसी गतिविधियों में शामिल होती हैं और भारत सरकार उन्हें नहीं रोकती, तो यह चिंता का विषय होगा. भारत को किसी भी प्रकार की अस्थिरता को समर्थन देने से बचना चाहिए.
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सवाल: क्या बीएनपी सरकार बनने के बाद शेख हसीना के प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की मांग आपकी प्राथमिकता होगी?
जवाब: शेख हसीना के मामलों को न्यायपालिका के दायरे में ही रखा जाएगा. जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, वह पारदर्शी तरीके से चलेगी. अदालत जो निर्देश देगी, सरकार उसी के अनुसार कदम उठाएगी. भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तारीक रहमान को फोन कर बधाई देना और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ढाका आना क्या नए दौर की शुरुआत का संकेत है?
जवाब: हम इसे सकारात्मक संकेत के रूप में देखते हैं. हमारे क्षेत्र को स्थिरता और सहयोग की जरूरत है. हम पड़ोसी हैं और सहयोग ही सामान्य स्थिति होनी चाहिए. चुनौतियां रहेंगी, लेकिन अगर व्यावहारिक तरीके से उन्हें सुलझाया जाए तो दोनों देश आगे बढ़ सकते हैं.
सवाल: भारत की चिंता है कि बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए न हो और कट्टरपंथ न बढ़े. इस पर आपकी प्रतिक्रिया?
जवाब: किसी भी प्रकार का उग्रवाद स्वीकार्य नहीं है. दोनों देशों को सुरक्षा सहयोग बढ़ाना चाहिए और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना चाहिए. बांग्लादेश में सांप्रदायिक सौहार्द बेहतर है. अगर हम अतीत की बातों में उलझे रहेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। हमें भविष्य की ओर देखना चाहिए.
सवाल: भारत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है. आपकी सरकार का रुख क्या होगा?
जवाब: बांग्लादेश में सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत है. सत्ता में परिवर्तन के दौरान भी किसी मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा. हम किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे. अगर दोनों देश आरोप-प्रत्यारोप में उलझेंगे तो समाधान नहीं निकलेगा. बेहतर है कि हर देश अपने आंतरिक मुद्दों को देखे और द्विपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दे.
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सवाल: क्या तारीक रहमान शपथ के बाद भारत को पहली द्विपक्षीय यात्रा के रूप में चुनेंगे?
जवाब: पहली प्राथमिकता देश के भीतर आर्थिक विकास और जनादेश के अनुसार घरेलू चुनौतियों को संबोधित करना है. उसके बाद क्षेत्रीय दौरे होंगे और भारत भी उन देशों में शामिल होगा जिनसे हम मजबूत द्विपक्षीय संबंध चाहते हैं.