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अल्पसंख्यकों से जुड़े ज्यादातर मामले सांप्रदायिक नहीं, आपराधिक... बांग्लादेश की यूनुस सरकार का दावा

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 2025 में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी घटनाओं की समीक्षा जारी की है. सरकार के अनुसार, दर्ज ज्यादातर घटनाएं सांप्रदायिक नहीं बल्कि सामान्य आपराधिक मामलों से जुड़ी थीं. कुल 645 मामलों में से केवल 71 को सांप्रदायिक श्रेणी में रखा गया है. सरकार ने तथ्य आधारित रिपोर्टिंग की अपील की है.

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बांग्लादेश में हिंसक मामलों पर यूनुस सरकार ने रिपोर्ट जार की है. (Photo- ITG)
बांग्लादेश में हिंसक मामलों पर यूनुस सरकार ने रिपोर्ट जार की है. (Photo- ITG)

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी घटनाओं को लेकर एक साल की समीक्षा रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में अल्पसंख्यकों से संबंधित अधिकांश घटनाएं सांप्रदायिक नहीं, बल्कि सामान्य आपराधिक मामलों की श्रेणी में आती हैं. यह समीक्षा देशभर के पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है.

मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की ओर से जारी बयान में बताया गया कि दिसंबर 2025 सेजनवरी 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़े कुल 645 मामले दर्ज किए गए. ये आंकड़े सत्यापित एफआईआर, जनरल डायरी, चार्जशीट और जांच की प्रगति रिपोर्ट के आधार पर जुटाए गए हैं.

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सरकारी समीक्षा के अनुसार, इन 645 मामलों में से केवल 71 घटनाओं को सांप्रदायिक प्रकृति का माना गया, जबकि 574 मामलों को गैर-सांप्रदायिक बताया गया है. सांप्रदायिक घटनाओं में मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों या मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं शामिल थीं.

वहीं, बाकी अधिकांश मामलों के पीछे जमीन विवाद, पड़ोसियों के झगड़े, राजनीतिक रंजिश, चोरी, यौन हिंसा और व्यक्तिगत दुश्मनी जैसे कारण पाए गए, जिनका धर्म से कोई सीधा संबंध नहीं था.

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पुलिस ने सैकड़ों मामले दर्ज किए

यूनुस ने कहा कि हर घटना गंभीर है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन सही वर्गीकरण जरूरी है ताकि गलत सूचना और डर का माहौल न बने. उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यकों से जुड़े ज्यादातर मामले कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का हिस्सा हैं, जो सभी नागरिकों को प्रभावित करती हैं.

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि पुलिस ने सैकड़ों मामलों में औपचारिक रूप से केस दर्ज किए, कई मामलों में गिरफ्तारियां हुईं और अन्य मामलों की जांच अभी जारी है. धार्मिक स्थलों से जुड़े या संवेदनशील मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया है.

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हिंसक अपराधों में 3000 से 3500 लोगों की मौत

राष्ट्रीय स्तर पर सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि कानून-व्यवस्था की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. हर साल करीब 3000 से 3500 लोगों की मौत हिंसक अपराधों में होती है. हालांकि सरकार का कहना है कि बेहतर पुलिसिंग, खुफिया समन्वय और तेज कार्रवाई के कारण हालात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं.

मोहम्मद यूनुस ने दोहराया कि संविधान के तहत मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और सभी समुदायों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सरकार की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है.

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