बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अब तक आम चुनाव नहीं हुआ हैं. मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं और अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं. 12 फरवरी को सदस्यों को चुनने के लिए चुनाव होंगे. इससे पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने मैनिफेस्टो जारी कर दिया है.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने इस मैनिफेस्टो का अनावरण करते हुए पावर स्ट्रक्चर और फॉरेन पालिसी में बड़े और महत्वपूर्ण बदलावों का वादा किया है.
BNP के मैनिफेस्टो में सबसे अहम प्रस्ताव उपराष्ट्रपति पद बनाने को लेकर है. पार्टी का मानना है कि यह पद बनाया जाता है तो गवर्नेंस सिस्टम में बैलेंस आएगा और डेमोक्रेटिक फ्रेमवर्क को मजबूती मिलेगी. इसके अलावा, प्रधानमंत्री के कार्यकाल को ज्याजा से ज्यादा दस सालों तक सीमित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि सत्ता का सेंट्रलाइजेशन रोका जा सके और पॉलिटिकल सिस्टम में ट्रांसपरेंसी और जवाबदेही तय हो सके.
विदेश नीति को लेकर BNP ने साफ़ तौर पर कहा है कि उनकी पॉलिसी “बांग्लादेश फर्स्ट” के सिद्धांत पर आधारित होगी. पार्टी ने यह भी जोर दिया है कि बांग्लादेश अन्य देशों के साथ दोस्ताना रिलेशन बनाए रखेगा, लेकिन किसी भी देश को वह अपना मालिक बनने की अनुमति नहीं देगा. साथ ही, BNP ने यह भी कहा है कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और अपने मामलों में भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगी.
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तारिक रहमान ने यह भी कहा कि बांग्लादेश को ऐसी विदेश पॉलिसी की जरूरत है जो राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखे और देश को किसी भी तरह की राजनीतिक या आर्थिक निर्भरता से मुक्त करे. उन्होंने साफ कहा कि BNP की सत्ता में आने पर बांग्लादेश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
इस मैनिफेस्टो के माध्यम से BNP ने संकेत दिया है कि वह न केवल देश के अंदरूनी राजनीतिक ढांचे में बदलाव चाहती है, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी बांग्लादेश की भूमिका को दोबारा परिभाषित करना चाहती है. अब यह चुनावी नतीजों पर निर्भर करेगा कि ये वादे मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाते हैं और BNP की राजनीति में क्या अहमियत होती है.