बांग्लादेश के वरिष्ठ हिंदू नेता और पूर्व जल संसाधन मंत्री रमेश चंद्र सेन की शनिवार को हिरासत में मौत हो गई. 85 साल के सेन लंबे समय से बीमार थे. उन्हें सुबह 9:10 बजे दीनाजपुर जिला जेल से दीनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी विभाग लाया गया, जहां 9:29 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
रमेश चंद्र सेन पांच बार सांसद चुने गए और वे अवामी लीग के वरिष्ठ नेता थे. उन्होंने 2024 के आखिरी चुनाव में भी जीत हासिल की थी. शेख हसीना सरकार में उन्होंने मंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभाई.
हालांकि, हाल ही में उनके खिलाफ हत्या समेत तीन मामलों में आरोप लगाया गया था. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अवामी लीग नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों में राजनीतिक बदले की भावना साफ़ तौर से नजर आ रही है और कई मुकदमों को ‘घोस्ट केस’ कहा जा रहा है.
सूत्रों ने दावा किया कि रमेश चंद्र सेन को जितनी चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए थी वो नहीं मिली. अगस्त 2024 में उनकी गिरफ्तारी के समय सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिसमें उनके हाथ रस्सियों से बंधे दिखे थे. बहुत से अवामी लीग नेता देश छोड़ गए, लेकिन सेन अपने घर पर ही रुके रहे क्योंकि उन्हें विश्वास था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है.
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उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, जहां कई लोगों ने इसे "प्रिजन मर्डर" और "कस्टोडियल किलिंग" बताया. अब तक हिरासत में बीमार होकर मरने वाले अवामी लीग नेताओं की संख्या कम से कम पांच बताई जा रही है.
रमेश चंद्र सेन का राजनीतिक प्रभाव इस बात से भी समझा जा सकता है कि उन्होंने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगिर जैसे बड़े विपक्षी नेता को हराकर चुनाव जीता था. उनका शव परिजनों को सौंपा जाएगा, लेकिन सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. उनकी मौत ने बांग्लादेश में मानवाधिकार, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और पॉलिटिकल रिवेंज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.