अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने आर्मीनिया को लेकर भारत और फ्रांस पर हमला बोला है. अलीयेव ने भारत और फ्रांस पर निशाना साधते हुए कहा है कि आर्मीनिया को हथियार सप्लाई करने वाले देश आग में घी डालने का काम कर रहे हैं. दरअसल, नागोर्नो-काराबाख इलाके को लेकर अजरबैजान से जारी विवाद के बीच आर्मीनिया ने हाल ही में भारत और फ्रांस के साथ हथियारों की बड़ी डील की है.
अजरबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान आर्मीनिया और अजरबैजान में जारी विवाद को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए इल्हाम अलीयेव ने कहा, "फ्रांस और भारत जैसे देश आर्मीनिया को हथियारों की सप्लाई कर आग में घी डाल रहे हैं. ये देश आर्मीनिया में भ्रम पैदा कर रहे हैं कि इन हथियारों की बदौलत वो काराबाख को वापस ले सकते हैं."
हाल के कुछ महीनों में आर्मीनिया ने फ्रांस और भारत के साथ एयर डिफेंस सिस्टम और बख्तरबंद वाहनों सहित कई प्रकार के हथियारों की डील की है.
अजरबैजान प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य होगाः अलीयेव
अलीयेव ने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत और फ्रांस की ओर से आर्मीनिया को जारी हथियार आपूर्ति से क्षेत्र में एक नया युद्ध शुरू हो सकता है. अगर आर्मीनिया को भारत और फ्रांस से महत्वपूर्ण हथियार (serious installations) मिलना शुरू हो जाता है तो अजरबैजान अपने लोगों की रक्षा करने के लिए प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य होगा.
अक्टूबर 2023 में आर्मीनिया के रक्षा मंत्री सुरेन पापिक्यन और फ्रांस के थेल्स ग्रुप ने एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था. इस अनुबंध के तहत फ्रांस, आर्मीनिया को तीन GM (Grand Master) 200 रडार देगा. इसके अलावा फ्रांस, आर्मीनिया को कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की डिलीवरी भी करेगा. वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, आर्मीनिया भारत से MArG 155 स्व-चालित हॉवित्जर खरीदेगा.
अंग्रेजी अखबार ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में आर्मीनिया के एक सीनियर अधिकारी हथियार डील के संबंध में चर्चा करने के लिए भारत आए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने कहा था कि आर्मीनिया की जरूरतों के अनुसार भारत एक विश्वसनीय हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हथियारों की पहली खेप की सफल डिलीवरी के बाद भारत आर्मीनिया को सैन्य उपकरणों की एक नई खेप की आपूर्ति करने पर विचार कर रहा है. भारत ने पहली खेप में पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, एंटी-टैंक मिसाइल, रॉकेट और गोला-बारूद भेजा था.
अजरबैजान-आर्मीनिया में क्या विवाद है?
आर्मीनिया और अजरबैजान दोनों ही देश 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद बने हैं. लेकिन दोनों देशों के बीच विवाद 1980 के दशक से ही है. दोनों देशों के बीच यह विवाद नागोर्नो-काराबाख इलाके पर कब्जे को लेकर है. सोवियत संघ के टूटने के बाद से नागोर्नो-काराबाख अजरबैजान के कब्जे में है.
अजरबैजान एक मुस्लिम देश है, जबकि आर्मेनिया ईसाई बहुल राष्ट्र है. नागोर्नो-काराबाख की बहुल आबादी भी ईसाई ही है. इसके बावजूद सोवियत संघ जब टूटा तो इसे अजरबैजान को दे दिया गया. यहां रहने वाले लोगों ने भी इलाके को आर्मेनिया को सौंपने के लिए वोट किया था.