scorecardresearch
 

समंदर का वो 'शिकारी', जिसे अमेरिका ने बनाया शिकार... जानें ईरानी युद्धपोत Dena की चौंकाने वाली ताकत

अमेरिकी नौसेना के पनडुब्बी हमले में ईरान का आधुनिक युद्धपोत आईआरआईएस डेना समुद्र में डूब गया. जहाज पर सवार 100 से ज्यादा लोगों में से लगभग 80 की मौत की खबर है. इस घटना ने हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

Advertisement
X
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर US ने हमला किया.
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर US ने हमला किया.

अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में ईरान के एक आधुनिक युद्धपोत पर पनडुब्बी के जरिए हमला किया. यह हमला खुले समुद्र में किया गया, जिसके बाद ईरानी नौसेना का युद्धपोत पूरी तरह तबाह होकर समुद्र में डूब गया. बताया जा रहा है कि जहाज पर 100 से ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें से लगभग 80 की मौत हो गई. इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है. खासकर श्रीलंका और भारत जैसे हिंद महासागर से जुड़े देशों के लिए यह बड़ी रणनीतिक चिंता मानी जा रही है. मसलन, यह युद्धपोत हवा से लेकर समुद्र तक में लड़ने की क्षमता रखता है, लेकिन बावजूद इसके यूएस नेवी ने इसे निशाना बनाकर तबाह कर दिया.

जिस युद्धपोत को निशाना बनाया गया, उसका नाम आईआरआईएस डेना था. यह ईरान की मौज क्लास फ्रिगेट श्रेणी का जहाज था और इसे ईरानी नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता था. इसका पेनेंट नंबर 75 था और यह ईरानी नौसेना के दक्षिणी बेड़े का हिस्सा था. इस जहाज का नाम ईरान के मशहूर पहाड़ माउंट डेना के नाम पर रखा गया था.

यह भी पढ़ें: हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला भारत के लिए खतरनाक! श्रीलंकाई सांसद ने किया आगाह

आईआरआईएस डेना का निर्माण ईरान के बंदर अब्बास स्थित नौसैनिक कारखानों में किया गया था. इसका निर्माण कार्य 2012 में शुरू हुआ, 2015 में इसे समुद्र में उतारा गया और 13 जून 2021 को इसे आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया. यह जहाज पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया था, जिसमें इसके इंजन और हथियार सिस्टम भी शामिल थे.

Advertisement

95 मीटर लंबाई, 10,000 हॉर्सपावर के इंजन, 140 नौसैनिकों की व्यवस्था

इस युद्धपोत की लंबाई लगभग 95 मीटर थी, चौड़ाई 11.1 मीटर और ड्राफ्ट करीब 3.25 मीटर था. इसका कुल वजन यानी डिस्प्लेसमेंट करीब 1,500 टन था. इसमें दो 10,000 हॉर्सपावर के इंजन और चार डीजल जनरेटर लगे थे. इनकी मदद से यह जहाज अधिकतम 30 नॉट यानी लगभग 55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता था. इस पर कुल 140 नौसैनिकों के रहने और काम करने की व्यवस्था थी.

आईआरआईएस डेना में आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सिस्टम लगी हुई थी. इसमें अस्र 3डी पीईएसए लंबी दूरी का रडार लगा था, जो करीब 300 किलोमीटर तक के दायरे में कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता था. जहाज में दुश्मन के हमलों से बचाव के लिए चाफ लॉन्चर भी लगे थे, जो मिसाइलों को भ्रमित करने का काम करते हैं.

एंटी शिप मिसाइलें, पनडुब्बियों से लड़ने की भी क्षमता

हथियारों की बात करें तो इस फ्रिगेट पर 76 एमएम की तेज फायरिंग करने वाली नौसैनिक तोप लगी थी. इसके अलावा 40 एमएम की फतह एंटी एयरक्राफ्ट गन भी थी, जो बोफोर्स डिजाइन पर आधारित मानी जाती है. जहाज पर 20 एमएम की ओरलिकॉन तोपें भी लगी थीं. दुश्मन के जहाजों पर हमला करने के लिए इसमें सी-802 या नूर श्रेणी की एंटी-शिप मिसाइलें तैनात थीं. हवाई हमलों से बचाव के लिए सय्याद-2 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी इसमें लगी थीं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ईरान ने इजरायल में खौफनाक तबाही का बनाया प्लान? परमाणु ठिकानों पर हमले की दी चेतावनी

पनडुब्बियों से मुकाबले के लिए इस युद्धपोत में 324 एमएम के हल्के टॉरपीडो लॉन्चर लगे थे. इसके अलावा इसमें एक हेलिपैड भी था, जहां बेल 212 एंटी सबमरीन हेलिकॉप्टर को उतारा और उड़ाया जा सकता था. यानी यह जहाज समुद्र, हवा और पानी के नीचे तीनों मोर्चों पर लड़ने में सक्षम था.

आईआरआईएस डेना को 2022-23 में दुनिया के कई देशों की यात्रा के लिए भी भेजा गया था. हाल ही में यह अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 अभ्यास में भाग लेने के लिए भारत आया था और कार्यक्रम पूरा करने के बाद ही इसे निशाना बनाया गया. इसलिए इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement