पाकिस्तानी सेना ने सोमवार को उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में मिसाइलों और मोर्टार से हमला किया. इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई और कम से कम 85 लोग घायल हुए हैं. चीन के उरुमकी में इसी महीने हुई शांति वार्ता के बाद यह पहली बड़ी हिंसक घटना है. घायलों में महिलाएं, बच्चे और विश्वविद्यालय के छात्र व प्रोफेसर शामिल हैं. अफगानिस्तान ने इसे हमले को युद्ध अपराध करार दिया है, जबकि पाकिस्तान ने विश्वविद्यालय को निशाना बनाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठ बताया है.
अफगान अधिकारियों ने बताया कि इस हमले की चपेट में असदाबाद शहर स्थित सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी और आम लोगों के घरों को निशना बनाया गया है.
हमले में 30 से ज्यादा छात्र-प्रोफेसर घायल
अफगान उप सरकारी प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के मुताबिक, सोमवार दोपहर कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद और अन्य जिलों में पाकिस्तानी मिसाइलें गिरीं. कुनार के सूचना निदेशक नजीबुल्लाह हनफी ने पुष्टि की कि हमले में सात लोगों की जान चली गई है.
उच्च शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी पर हुए हमले में करीब 30 छात्र और प्रोफेसर घायल हुए हैं. विश्वविद्यालय की इमारतों और परिसर को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। अफगानिस्तान ने इस कृत्य को बर्बरता और उकसाने वाली कार्रवाई बताया है.
निराधार में अफगान के दावे: PAK
उधर, पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अफगान मीडिया और आधिकारिक बयानों को झूठ करार दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि उनकी कार्रवाई सटीक और खुफिया जानकारी पर आधारित होती है. इस्लामाबाद ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी पर कोई हमला नहीं किया गया है और अफगान दावे निराधार हैं. पाकिस्तान लंबे वक्त से अफगानिस्तान पर टीटीपी (TTP) जैसे आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाता रहा है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं.
शांति वार्ता पर संकट
ये हमला ऐसे समय में हुआ है, जब चीन की मध्यस्थता में उरुमकी में हुई वार्ता को अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने सकारात्मक बताया था. दोनों देश अप्रैल की शुरुआत में संघर्ष न बढ़ाने और व्यापक समाधान खोजने पर सहमत हुए थे. फरवरी से शुरू हुई इस जंग में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई है, क्योंकि दोनों पड़ोसी देश 'खुले युद्ध' जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस सीमावर्ती संघर्ष के कारण अब तक 94,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं. मार्च में ईद-उल-फितर के मौके पर अस्थायी युद्धविराम हुआ था, लेकिन वह ज्यादा समय तक टिक नहीं सका. चीन के अलावा तुर्की, कतर, यूएई और सऊदी अरब भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर चुके हैं. सोमवार की घटना ने साबित कर दिया है कि चीन द्वारा किए गए शांति प्रयास अभी बहुत नाजुक दौर में हैं.