पश्चिम बंगाल में सोमवार को करीब 15 साल बाद फिर से 'जनता दरबार' लगा. मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने पहली बार सीधे आम लोगों से मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं. कोलकाता के साल्ट लेक स्थित बीजेपी दफ्तर में सुबह से ही लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने लगे. मुख्यमंत्री ने लोगों से एक-एक कर बात की और उनकी शिकायतें सुनीं. लंबे समय बाद लोगों को सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने का मौका मिला. इस दौरान बीजेपी नेता लॉकेट चटर्जी भी वहां मौजूद रहीं
खास बात यह रही कि आज ही राज्य कैबिनेट की बैठक भी तय थी, लेकिन उससे पहले मुख्यमंत्री ने आम लोगों की बात सुनने को प्राथमिकता दी. जनता दरबार में पहुंचे लोग अपनी-अपनी परेशानियां लेकर आए थे. कोई स्थानीय समस्या बता रहा था तो कोई सरकारी कामकाज को लेकर शिकायत कर रहा था. इस दौरान सीएम शुभेंदु लोगों की बातें ध्यान से सुनते नजर आए.
इस कार्यक्रम में शामिल हुई एक युवती, जो पेशे से नर्स है, उसने कहा, 'हमें इस बात से ही राहत मिली कि मुख्यमंत्री ने हमारी बात सुनने के लिए समय निकाला'. लोगों का कहना था कि लंबे समय बाद उन्हें सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला है.
जनता दरबार में बिधाननगर के रहने वाले सुरेश साऊ भी पहुंचे थे. उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि घर बनाने के दौरान उन्हें रेत और सीमेंट स्थानीय टीएमसी नेताओं से ही खरीदने का दबाव झेलना पड़ता था. उन्होंने इलाके में 'सिंडिकेट राज' चलने की शिकायत की. सुरेश साऊ की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तुरंत बिधाननगर पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (DC) को कार्रवाई के निर्देश दिए. जनता दरबार में इस तरह मौके पर ही कार्रवाई होने से वहां मौजूद लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई.
बंगाल में इस तरह का जनता दरबार काफी समय बाद देखने को मिला है. इससे पहले साल 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके कालीघाट स्थित आवास पर कुछ समय तक जनता दरबार लगाया जाता था. हालांकि बाद में वह बंद हो गया था.
अब करीब 15 साल बाद बीजेपी मुख्यालय में फिर से जनता दरबार शुरू हुआ है. राजनीतिक तौर पर भी इसे बड़ा संदेश माना जा रहा है, क्योंकि नई सरकार सीधे लोगों से जुड़ने की कोशिश करती नजर आ रही है.