पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी शनिवार को एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आईं. सफेद साड़ी में दिखने वाली ममता इस बार काला एडवोकेट गाउन पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं.
तेज गर्मी के बीच सुबह करीब 10:20 बजे ममता बनर्जी अपनी सफेद एसयूवी से हाईकोर्ट पहुंचीं. विधानसभा से करीब 100 मीटर दूर उस वक्त नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी विधायकों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मौजूद थे, जबकि ममता पोस्ट पोल हिंसा के मुद्दे पर अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ने पहुंची थीं.
ममता के साथ वरिष्ठ वकील और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की अगुवाई में उनकी कानूनी टीम मौजूद थी. कोर्ट पहुंचने के बाद उन्हें एडवोकेट गाउन पहनने में मदद की गई और फिर वह शांत और संयमित अंदाज में कोर्ट परिसर में दाखिल हुईं.
कोर्ट रूम नंबर-1 में ममता के पहुंचने की खबर फैलते ही भारी भीड़ जमा हो गई. बड़ी संख्या में वकील कोर्ट रूम में पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस को आम लोगों की एंट्री सीमित करनी पड़ी.
करीब दो दशक से रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के मुताबिक, उन्होंने पहली बार ममता बनर्जी को एडवोकेट गाउन में और इतने शांत अंदाज में देखा.
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की बेंच से कहा कि वह 1985 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया में वकील के तौर पर नामांकित हुई थीं और खुद अदालत के सामने दलील रखना चाहती हैं.
टीएमसी की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि कई इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं. कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि खेजुरी में 60 दुकानें जला दी गईं, 10 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई और गोगहाट में बुलडोजर से पार्टी कार्यालय तोड़े गए.
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इसके बाद ममता बनर्जी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि नवविवाहित जोड़ों, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को घरों से निकाला जा रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके घर के बाहर भी रोज अशांति और धमकी का माहौल रहता है.
ममता ने अदालत से कहा, 'यह बुलडोजर का राज्य नहीं, संस्कृति का राज्य है. बंगाल को बचाइए सर.' उन्होंने पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की.
सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति ने उन्हें 'ड्रामा क्वीन' कह दिया, जिसके बाद चीफ जस्टिस ने अदालत की मर्यादा बनाए रखने को लेकर कड़ी चेतावनी दी.
कोर्ट से बाहर निकलते वक्त माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया. बड़ी संख्या में लोग और वकील मौजूद थे. इसी दौरान 'चोर चोर' और 'जय श्रीराम' के नारे भी लगे. भारी भीड़ और मीडिया के बीच ममता को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला गया.
हालांकि, पूरे घटनाक्रम के दौरान ममता बनर्जी शांत रहीं. उन्होंने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया और फिर अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गईं.
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पुलिस को हिंसा रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि राजनीतिक पहचान चाहे जो भी हो, हिंसा प्रभावित लोगों को तुरंत उनके घरों और दुकानों में वापस बसाया जाए.
कोर्ट ने सभी पक्षों को पांच हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है. बाद में अदालत तय करेगी कि इस मामले की सुनवाई बड़ी बेंच को सौंपी जाए या नहीं.