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फर्जी सिग्नेचर केस में बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें, CID हेडक्वार्टर में 8 घंटे तक पूछताछ

सीआईडी ने कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी विधायक कुणाल घोष से पूछताछ की. कुणाल घोष ने बताया कि जांच अधिकारियों ने दोनों नेताओं को आमने-सामने बिठाकर सवाल-जवाब किए.

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जानकारी के मुताबिक अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करीब साढ़े 8 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली. (File Photo)
जानकारी के मुताबिक अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करीब साढ़े 8 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली. (File Photo)

पश्चिम बंगाल सीआईडी ने रविवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी विधायक कुणाल घोष से लंबी पूछताछ की. जानकारी के मुताबिक, यह पूछताछ विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों पर विधायकों के हस्ताक्षर में कथित धोखाधड़ी की जांच के सिलसिले में की गई.

कुणाल घोष ने सीआईडी दफ्तर से बाहर आने के बाद दावा किया कि जांच अधिकारियों ने दोनों नेताओं को आमने-सामने बिठाकर सवाल-जवाब किए. करीब चार घंटे तक चली पूछताछ के बाद घोष ने से कहा, 'मैंने उनके सभी सवालों के जवाब दिए हैं. मैंने जांच में सहयोग किया है.'

हालांकि, न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करीब साढ़े 8 घंटे से भी ज़्यादा समय तक चली.

यह भी पढ़ें: ममता का सांसद सयानी घोष और सुदीप बंदोपाध्याय पर सख्त एक्शन, TMC के अहम पदों से हटाया

वहीं, बताया जा रहा है कि सीआईडी अधिकारियों ने पहले बनर्जी और घोष दोनों से अलग-अलग पूछताछ की और फिर उन्हें एक साथ बैठाया.

एक अधिकारी ने जानकारी दी कि, पूछताछ सत्रों का रिकॉर्ड रखा गया है. बैठक वाले दिन (19 मई) के बारे में सवाल पूछे गए. बैठक में कौन-कौन मौजूद था और प्रस्ताव पर किसने हस्ताक्षर किए, इस बारे में भी सवाल पूछे गए.

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बता दें, 6 मई को TMC विधायकों ने ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बैठक की और विपक्ष के नेता के पद के लिए सोवनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा. हालांकि, औपचारिक प्रस्ताव तुरंत विधानसभा में पेश नहीं किया गया.

19 मई को एक नई बैठक हुई, जिसके बाद चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज विधानसभा में सौंपा गया.

बाद में, TMC विधायकों द्वारा सौंपे गए विभिन्न दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों में कथित तौर पर विसंगतियां पाए जाने के बाद सवाल उठाए गए. इस मामले को लेकर बाद में FIR दर्ज की गई और सीआईडी जांच शुरू हुई. सीआईडी इस मामले के सिलसिले में कई विधायकों से पहले ही पूछताछ कर चुकी है.

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