पश्चिम बंगाल के BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी और PA चंद्रनाथ रथ की हत्या की जांच में एक नया मोड़ आ गया है. वारदात में इस्तेमाल की गई एक बाइक आसनसोल के बर्नपुर इलाके के एक पते से जुड़ी थी. हालांकि, जब पुलिस उस जगह पर पहुंची, तो पता चला कि वहां न तो बाइक का रजिस्टर्ड मालिक मौजूद है और न ही वह बाइक. इससे यह शक पैदा हो गया है कि रजिस्ट्रेशन की जानकारी फर्जी हो सकती है.
वाहन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड के अनुसार, रजिस्ट्रेशन नंबर WB44D1990 वाली बाइक पश्चिम बर्दवान RTO के तहत बिभाश कुमार भट्टाचार्य के नाम पर रजिस्टर्ड है. बताया गया है कि यह रजिस्ट्रेशन 4 मई 2012 को जारी किया गया था और 2 मई 2027 तक वैध है. इसका पता क्वार्टर नंबर AB 7/12, गुरुद्वारा रोड, बर्नपुर, हीरापुर, पश्चिम बंगाल दर्ज है.
हालांकि, जब गुरुवार को मीडियाकर्मी इस पते पर पहुंचे, तो वहां रहने वाले मौजूदा निवासी धर्मवीर कुमार (जो SAIL ISP बर्नपुर के कर्मचारी हैं) ने दावा किया कि वह 2014 से यहां रह रहे हैं और बिभाश कुमार भट्टाचार्य नाम के किसी भी व्यक्ति को नहीं जानते.
धर्मवीर कुमार ने बताया कि यह क्वार्टर उन्हें कंपनी ने दिया है और आवंटित किए जाने से पहले खाली पड़ा था. उन्होंने आगे कहा कि उनके पास एक दूसरी बाइक है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर WB 38 AC 4485 है. उन्होंने यह बाइक 2013 में चित्रा इलाके में स्थित डॉली लॉज में रहते हुए खरीदी थी.
उन्होंने साफ तौर पर इस बात से इनकार किया कि उन्होंने बर्नपुर के इस मौजूदा पते से कभी कोई बाइक खरीदी या बेची हो. समाचार रिपोर्टों के जरिए यह जानने के बाद कि हत्या के मामले में इस्तेमाल की गई बाइक से जुड़ा पता उनके ही घर का है, उन्होंने हैरानी भी जताई.
पत्रकारों से बात करते हुए धर्मवीर ने पुष्टि की कि गुरुवार सुबह पुलिस अधिकारी गाड़ी की डिटेल के संबंध में पूछताछ करने के लिए उनके घर आए थे.
इलाके के रास्तों से अच्छी तरह वाकिफ थे अपराधी
जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हमलावर भागने के रास्तों से अच्छी तरह वाकिफ लग रहे थे और उन्होंने अपराध को अंजाम देने के लिए कम से कम दो बाइक और एक कार का इस्तेमाल किया था.
बताया गया है कि हमले से कुछ घंटे पहले घटनास्थल के पास एक संदिग्ध वाहन भी देखा गया था. गुरुद्वारा रोड पर AB-टाइप क्वार्टर के स्थानीय निवासी यह जानकर हैरान रह गए कि इस पते का संबंध एक हत्या की जांच से जुड़ा है, जबकि वहां ऐसा कोई व्यक्ति रहता ही नहीं है.
जांचकर्ताओं की अगली चुनौती
पुलिस अब आरटीओ (RTO) रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि बिभाश कुमार भट्टाचार्य के असली अस्तित्व या पहचान पत्र की वास्तविकता का पता लगाया जा सके. पुलिस को शक है कि यह पूरी प्रक्रिया जांच को गुमराह करने के लिए की गई एक सोची-समझी 'हेराफेरी' का हिस्सा है.