शारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन को 13 साल बाद बड़ी राहत मिली है. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी है और अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. उम्मीद की जा रही है कि वो कल यानी गुरुवार को जेल से रिहा हो सकते हैं. यह फैसला जस्टिस राजर्षि भारद्वाज और जस्टिस उदय कुमार की डिवीजन बेंच ने सुनाया. अदालत ने राज्य पुलिस के तहत दर्ज दो मामलों में उन्हें जमानत दी है. इस फैसले के बाद उनकी रिहाई में अब कोई कानूनी अड़चन नहीं बची है.
अदालत ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया. कोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को तेज सुनवाई का अधिकार है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सुदीप्त सेन लंबे समय से जेल में बंद थे और उनकी हिरासत की अवधि उन धाराओं में तय अधिकतम सजा से भी ज्यादा हो चुकी है.
कोर्ट ने यह भी माना कि इतने लंबे समय तक उन्हें जेल में रखना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है. साथ ही उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए भी अदालत ने उन्हें राहत दी. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सुदीप्त सेन को सशर्त जमानत दी है.
सुदीप्त सेन को मिली जमानत
हालांकि जमानत के साथ अदालत ने कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं. सुदीप्त सेन को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना होगा. वह बिना अदालत की अनुमति के राज्य से बाहर नहीं जा सकेंगे. उन्हें अपने स्थायी पते की जानकारी बारासात पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को देनी होगी. इसके अलावा उन्हें किसी भी ऐसे नए प्रोजेक्ट से जुड़ने की अनुमति नहीं होगी, जिसमें धोखाधड़ी की आशंका हो.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे. उन्हें अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को देना होगा और फोन हमेशा चालू रखना होगा. इसके साथ ही सुदीप्त सेन को नियमित रूप से पुलिस के संपर्क में रहना होगा और हर महीने बारासात पुलिस स्टेशन में उपस्थित होकर अपनी जानकारी देनी होगी.
कई सख्त शर्तों के साथ दी गई सशर्त जमानत
यह मामला राज्य के सबसे बड़े चिटफंड घोटालों में से एक रहा है, जिसमें सुदीप्त सेन को मुख्य आरोपी माना गया. उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही मामला लगातार चर्चा में रहा है. अब 13 साल बाद मिली इस जमानत ने एक बार फिर इस केस को सुर्खियों में ला दिया है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है.